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Tag Archives: Motivational Hindi Stories

अनकहा सच: नाजायज रिश्तों की जायज कहानी

अनकहा सच: नाजायज रिश्तों की जायज कहानी

कितनी बार अपनी पसंदीदा नीली कलम उठाई और डायरी के बीच में फँसा दी। भूरे ज़िल्द की डायरी के सफ़ेद पन्नों ने जैसे अपनी उम्र पूरी कर ली हो और हल्की पीली चादर तान कर सोने जा रहे हो। तकदीर का खेल पर पन्नों के बीच छुपकर भला कहाँ चैन पाता है, वो तो आज़ाद होकर सबको अपनी उँगलियों पर …

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चाँद और लम्बू जिराफ़ की दोस्ती पर हिंदी बाल-कहानी

चाँद और लम्बू जिराफ़ की दोस्ती पर हिंदी बाल-कहानी

रोज़ की तरह आज फ़िर खेल-खेल में चाँद सितारों की आपस में लड़ाई हो गई थी। चाँद बेचारा क्या करता, वह एक तरफ़ अकेला पड़ जाता और ढेर सारे सितारे एक तरफ़… आख़िर चाँद रूठ गया और बोला – “मैं जा रहा हूँ, धरती की ओर…” सितारे यह सुनकर घबरा गए। उन्होंने उसे बहुत मनाया। उसकी बड़ी खुशामद की, पर …

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योग दिवस पर दिलचस्प कहानी: स्वीटू का प्राणायाम

योग दिवस पर दिलचस्प कहानी: स्वीटू का प्राणायाम

आज सुबह से नीलू चिड़िया तालाब के किनारे बैठी अपनी सहेली स्वीटू मछली का बहुत देर से इंतज़ार कर रही थी पर स्वीटू का कहीं अता पता नहीं था। नीलू को अब भूख भी लगने लगी थी। उसने इधर उधर कुछ खाने के लिए ढूंढना शुरू किया। तभी कुछ दूरी पर चिप्स के टुकड़े देखकर उसके मुँह में पानी आ …

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पितृ दिवस पर कहानी: बाबूजी

Hindi Moral Story about a School Teacher परोपकार

जब ईश्वर जरुरत से ज्यादा झोली में गिर देता हैं तो वह भी मनुष्य के लिए अहंकार और पतन का कारण बन जाता हैं। ऐसा ही कुछ हुआ चाँदनी के साथ… सभ्य, सुशील और बेहद महत्वकांशी चाँदनी को जब महात्मा गाँधी के आदर्शों पर जीवन पर्यन्त चलने वाले ईमानदार और अकेले बाबूजी ने उसे पहली बार सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल …

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नशा: तम्बाकू सेवन के हानिकारक प्रभाव और पश्चाताप की कहानी

नशा - पश्चाताप की कहानी

क्या चाचा, लो जरा सा आईना तो देख लो… कितने दिन हो गए तुमने बाल भी नहीं सँवारे। सूरज की आवाज़ से मैं खिड़की से बाहर झाँकता हुआ जैसे नींद से जागा। मैंने पनियल आँखों से सूरज की ओर देखा, जो मेरा भतीजा था पर आज मेरे बेटे से बढ़कर मेरा साथ दे रहा था। वो मेरी मन-स्तिथि समझ गया …

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ईदगाह: प्रेमचंद की ईद के त्यौहार पर लोकप्रिय कहानी

ईदगाह - Heart Touching Hindi Story by Munshi Premchand

मुंशी प्रेमचंद (अंग्रेज़ी: Munshi Premchand, जन्म: 31 जुलाई, 1880 – मृत्यु: 8 अक्टूबर, 1936) भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंज़िलों से गुज़रा। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे …

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देव-कन्या: नर्स और मरीज की एक प्रेरणादायक कहानी

Dev kanya

“लगता है जिन्दगी और मौत के बीच का फासला बहुत कम है…!” “ऐसा मत बोलो… जन्म हो या मृत्यु, जो कुछ ऊपर वाले ने लिख दिया वह होना तय है, घबराने से कुछ नहीं मिलता! जिन्दगी के साथ सुख-दुःख तो लगे ही रहते हैं।” “और तो कुछ नहीं, बस छोटी का विवाह मेरे सामने हो जाता फिर भले ही चला …

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रबीन्द्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ कहानियों में से एक: गूंगी

रबीन्द्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ कहानियों में से एक: गूंगी

टैगोर के १५० वें जन्मदिन के अवसर पर उनके कार्यों का एक (कालनुक्रोमिक रबीन्द्र रचनाबली) नामक एक संकलन वर्तमान में बंगाली कालानुक्रमिक क्रम में प्रकाशित किया गया है। इसमें प्रत्येक कार्य के सभी संस्करण शामिल हैं और लगभग अस्सी संस्करण है। २०११ में, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय के साथ अंग्रेजी में उपलब्ध टैगोर के कार्यों की सबसे बड़ी …

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Kabuliwala: Bengali short story written by Rabindranath Tagore

Kabuliwala - Rabindranath Tagore Classic English Short Story

My five years’ old daughter Mini cannot live without chattering. I really believe that in all her life she has not wasted a minute in silence. Her mother is often vexed at this, and would stop her prattle, but I would not. To see Mini quiet is unnatural, and I cannot bear it long. And so my own talk with …

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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष बाल कहानी: बंटी की दादी

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष

ना जाने कहाँ छुपा बैठा हैं ये, रोज का इसका यह तमाशा हैं… आवाज़ लगा लगा कर तो मेरा गला दुःख गया हैं… मीनू उसे ढूंढते हुए बगीचे तक आ गई थी। आम के पेड़ के पीछे छुपे बैठे तीन साल के बंटी को देखकर मीनू का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच गया था। उसने ना आव देखा ना ताव …

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