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Tag Archives: Motivational Hindi Poems

गंगा की विदाई: गंगा नदी पर देश भक्ति कविता

Desh Prem Poem About Holy River Ganga गंगा की विदाई

Indian civilization owes its existence to the mighty Ganges originating in Himalaya. Ganga is the daughter of Himalaya. Here is an excerpt from a lovely poem by Makhanlal Chaturvedi, telling how the river transforms the great northern Indian planes as it flows to the ocean. Poet exhorts Himalaya to give Ganga to Saagar in Kanyadaan… शिखर–शिखरियों में मत रोको‚ उसकी …

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अपना घर है सबसे प्यारा: प्रेरणादायक बाल-कविता

अपना घर है सबसे प्यारा

Here is a little poem that my mother taught us kids. I do not know who wrote this poem, but it has a lot of truth in it! चिड़ियाँ के थे बच्चे चार निकले घर से पंख पसार पूरब से पश्चिम को आए उत्तर से दक्षिण को धाए उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम देख लिया हमने जग सारा अपना घर है …

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झंडा ऊँचा रहे हमारा: श्यामलाल पार्षद उत्प्रेरक झंडा गीत

झंडा ऊँचा रहे हमारा – श्यामलाल पार्षद

4to40.com has become very popular amongst school children and their parents who find on this site poems to recite in class, or for home-work. It is therefore important that poems well entrenched in public memory should be available on this site. This famous poem of desh prem should be of interest to many readers. We often hear it on Doordarshan on …

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भारतमाता ग्रामवासिनी: सुमित्रानंदन पंत

भारतमाता ग्रामवासिनी - सुमित्रानंदन पंत

Soul of India resides in her villages. Agyeya said so in his poem “Hamara Desh” and in this famous poem Sumitranandan Pant Ji makes the point that the gentle, compassionate, enduring and caring Bharatmata lives in villages. भारतमाता ग्रामवासिनी: सुमित्रानंदन पंत भारत माता ग्रामवासिनी। खेतों में फैला है श्यामल, धूल भरा मैला सा आँचल, गंगा यमुना में आँसू जल, मिट्टी …

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जयद्रथ वध: राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त

जयद्रथ वध: राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त

Jayadrath Vadh is a famous Epic written by the Rashtra Kavi Maithili Sharan Gupt, and tells the story in Mahabharata of the killing of Jayadrath the Kaurava by Arjuna, the Pandava Warrior. In the excerpt given below, Abhimanyu, the 16 year old son of Arjuna is bent upon tackling a specially tricky Kaurav army formation (Chakraviyuh) that he alone can …

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हमारा अतीत (भारत–भारती से): मैथिली शरण गुप्त

हमारा अतीत (भारत–भारती से): मैथिली शरण गुप्त

Bharat-Bharati is a classic Maha-Kavya (epic) written by Rashtra Kavi Methili Sharan Gupt. It traces the rise and fall of Indian civilization and gives prescription for regaining the heights that the civilization had once achieved in the past. The book has three chapters on the past, present and future of India. There are 703 verses in all. I have presented …

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अपराधी कौन: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की देश प्रेम कविता

Hindi Poem on Desh Prem / Frustration अपराधी कौन - रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भारत में हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि …

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भये प्रगट कृपाला: तुलसीदास द्वारा रचित श्री राम स्तुति

भये प्रगट कृपाला - गोस्वामी तुलसीदास

भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मनहारी, अद्भुत रूप विचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी॥ भावार्थ: दीनों पर दया करने वाले, कौसल्या के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए। मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करके माता हर्ष से भर गई। नेत्रों को …

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गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे हिंदी अनुवाद के साथ

तुलसीदास जी के दोहे

गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे अर्थ सहित (Tulisdas Ke Dohe With Meaning in Hindi) गोस्वामी तुलसीदास (जन्म- 1532 ई. – मृत्यु- 1623 ई.) हिन्दी साहित्य के आकाश के परम नक्षत्र, भक्तिकाल की सगुण धारा की रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि है। तुलसीदास एक साथ कवि, भक्त तथा समाज सुधारक तीनों रूपों में मान्य है। श्रीराम को समर्पित ग्रन्थ श्रीरामचरितमानस वाल्मीकि …

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छोटा चूहा: पूर्णिमा वर्मन की हास्यप्रध बाल-कविता

छोटा चूहा: पूर्णिमा वर्मन की हास्यप्रध बाल-कविता

चूहा एक स्तनधारी प्राणी है। यह साधारणतः सभी देशों में विशेषकर उष्ण देशों में पाया जाता है। यह कपड़ा, सूटकेश आदि को काटकर बहुत हानि पहुँचाता है। शरीर बालों से आवृत एवं सिर, गर्दन, धड़ तथा पूँछ में विभक्त होता है। ऊपरी एवं निचली ओठ से घिरा रहता है। सिर में एक जोड़ा नेत्र, दो बाह्यकर्ण, धड़ में दो जोड़े पैर …

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