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Tag Archives: Life And Time Hindi Poems

आया वसंत: सोहनलाल द्विवेदी की बसंत पर बाल-कविता

आया वसंत - सोहनलाल द्विवेदी

Here is a simple poem on spring for children. The scenery described comprising the mustard fields and flowering of mango trees is something that many urban children today would not be familiar with. For old timers, these things arouse nostalgia. आया वसंत: सोहनलाल द्विवेदी आया वसंत आया वसंत छाई जग में शोभा अनंत सरसों खेतों में उठी फूल बौरें आमों …

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दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे: बाल-कविता

Diwali Festival Hindi Bal Kavita दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दिवाली रे, खुशी-खुशी सब हंसते आओ, आज दिवाली रे। मैं तो लूंगा खेल-खिलौने, तुम भी लेना भाई, नाचो, गाओ, खुशी मनाओ, आज दिवाली आई। आज पटाखे खूब चलाओ, आज दिवाली रे, दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दिवाली रे। नए-नए मैं कपड़े पहनूं, खाऊं खूब मिठाई, हाथ जोड़कर पूजा कर लूं आज दिवाली आई। खाओ मित्रों, …

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दिवाली पर हिंदी कविता: मंगल दीप दिवाली

Motivational Hindi Poem about Diwali Festival मंगल दीप दिवाली

वह मंगल दीप दिवाली थी, दीपों से जगमग थाली थी। कोई दिये जला कर तोड़ गया, आशा की किरन को रोक गया॥ इस बार न ये हो पाएगा, अँधियारा ना टिक पाएगा। कर ले कोशिश कोई लाख मगर, कोई दिया न बुझने पाएगा॥ जब रात के बारह बजते हैं, सब लक्ष्मी पूजा करते हैं। रात की कालिमा के लिए, दीपों …

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दिवाली के त्यौहार पर कविता: आई रे आई दिवाली

आई रे आई दिवाली - टीना जिंदल

आई रे आई दिवाली पटाखे तोहफे लायी दिवाली दिल को खुश करने आई दिवाली आई रे आई दिवाली आई रे आई दिवाली मज़े करते हुए बच्चे देखो मम्मी का ना पापा का डर है स्कूल का ना टीचर का डर है बल्ब फूल लगते पापा मंदिर सजाती देखो मम्मी बच्चे हैं खेलते कूदते पटाखों में एकदम मस्त हैं खाना देखो …

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दीपावली पर छोटी हिन्दी कविता: दिवाली रोज़ मनाएं

दिवाली रोज़ मनाएं - संदीप फाफरिया ‘सृजन’

दिवाली रोज मनाएं फूलझड़ी फूल बिखेरे चकरी चक्कर खाए अनार उछला आसमान तक रस्सी-बम धमकाए सांप की गोली हो गई लम्बी रेल धागे पर दौड़ लगाए आग लगाओ रॉकेट को तो वो दुनिया नाप आए टिकड़ी के संग छोटे-मोटे बम बच्चों को भाए ऐसा लगता है दिवाली हम तुम रोज मनाएं। ∼ संदीप फाफरिया ‘सृजन’

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गरीब की दिवाली: एक हृदय विदारक कविता

गरीब की दिवाली

पटाखों कि दुकान से दूर हाथों में, कुछ सिक्के गिनते मैंने उसे देखा। एक गरीब बच्चे कि आखों में, मैने दिवाली को मरते देखा। थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की, पर उन्ही पूराने कपडो को मैने उसे साफ करते देखा। हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश, उसे चूप-चाप ग़मो को पीते देखा। जब मैने कहा, “बच्चे, …

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अपने ही मन से कुछ बोलें: अटल की आत्म चिंतन कविता

अपने ही मन से कुछ बोलें - अटल बिहारी वाजपेयी

Atal Jis poems have special significance. He was leader of a country of one billion people; a seasoned politician who would have seen all that is to be seen on this earth. It is admirable that he retained the sensitivity of heart as a poet too, a member of the rare breed of philosopher kings. I was specially moved by …

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दो अनुभूतियाँ: अटल जी की मानव मनोदशा पर कविताएँ

दो अनुभूतियाँ: अटल बिहारी वाजपेयी

In most human endeavors, there are ups and downs. But in the field of politics, downswings can be brutal and up-swings full of elation and optimism. Two poems of Atal Ji reflect beautifully on this roller coaster. First one appears to have been written in a phase of disillusionment and dejection when the poet’s heart says, “I won’t sing any …

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आओ मन की गांठें खोलें: अटल बिहारी वाजपेयी

वाकपटुता कहें, हाज़िरजवाबी कहें या sense of humor कह लें। यह कोई ऐसा गुण नहीं है जिसे राजनीतिक अहर्ताओं में शुमार किया जाता हो। लेकिन यह भी सच है कि इसमें पारंगत नेताओं ने इसका सफल राजनीतिक इस्तेमाल भी किया। दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की गिनती उनमें बिना किसी शुबहे के की जा सकती है। वह अपनी वाकपटुता से न सिर्फ़ …

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आओ फिर से दिया जलाएँ: अटल की प्रेरणादायक कविता

आओ फिर से दिया जलाएँ - अटल बिहारी वाजपेयी

राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ वाजपेयी एक अच्छे कवि और संपादक भी थे। वाजपेयी ने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में 25 दिसंबर, 1924 को इनका जन्म हुआ। पुत्रप्राप्ति से हर्षित पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी को तब शायद ही अनुमान रहा होगा कि आगे चलकर उनका यह नन्हा बालक …

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