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Tag Archives: India Poems for Children

Mahatma Gandhi: Poem on Father of The Nation

Mahatma Gandhi - Father of The Nation

Mahatma Gandhi (October 2, 1869 to January 30, 1948) was the leader of India’s non-violent independence movement against British rule and in South Africa who advocated for the civil rights of Indians. Born in Porbandar, India, Gandhi studied law and organized boycotts against British institutions in peaceful forms of civil disobedience. He was killed by a fanatic in 1948. Young …

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मजदूर दिवस पर हिंदी कविता: मैं एक मजदूर हूं

मजदूर दिवस पर हिंदी कविता - मैं एक मजदूर हूं

विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस “1 मई” के दिन मनाया जाता है। किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों तथा कामगारों (मजदूर / कारीगर) पर निर्भर होती है। एक मकान को खड़ा करने और सहारा देने के लिये जिस तरह मजबूत “नीव” की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ठीक वैसे ही किसी समाज, देश, उद्योग, संस्था, व्यवसाय को …

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युगावतार गांधी: सोहनलाल द्विवेदी

Hindi Poem about Father of the Nation - Mahatma Gandhi युगावतार गांधी

चल पड़े जिधर दो डग, मग में चल पड़े कोटि पग उसी ओर, पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि पड़ गए कोटि दृग उसी ओर। जिसके शिर पर निज धरा हाथ उसके शिर-रक्षक कोटि हाथ, जिस पर निज मस्तक झुका दिया झुक गए उसी पर कोटि माथ॥ हे कोटिचरण, हे कोटिबाहु, हे कोटिरूप, हे कोटिनाम, तुम एकमूर्ति, प्रतिमूर्ति कोटि हे …

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तुम्हें नमन: सोहनलाल द्विवेदी की प्रेरणादायक कविता

तुम्हें नमन - सोहनलाल द्विवेदी

Albert Einstein said about him, “Generations to come will scarcely believe that such a one as this walked the earth in flesh and blood”. What a phenomenon our Father of the nation was! He took on an empire about which it was said that the “sun never sets on it”, and lead a whole subcontinent to freedom. That too while …

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अरुण यह मधुमय देश हमारा: जय शंकर प्रसाद

अरुण यह मधुमय देश हमारा - जय शंकर प्रसाद

A lovely classic by Jai Shankar Prasad. Hindi is a bit difficult so I have provided the meanings of difficult words… अरुण यह मधुमय देश हमारा: जय शंकर प्रसाद अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा। सरस तामरस गर्भ विभा पर नाच रही तरुशिखा मनोहर छिटका जीवन हरियाली पर मंगल कुंकुम सारा। लघु सुरधनु …

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हिमाद्रि तुंग शृंग से: जय शंकर प्रसाद की देशप्रेम कविता

Jaishankar Prasad Inspirational Desh Bhakti Poem हिमाद्रि तुंग शृंग से

Here is an old classic inspirational poem by Jay Shankar Prasad. हिमाद्रि तुंग शृंग से: जय शंकर प्रसाद हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती – स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती – ‘अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो, प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!’ असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्यदाह-सी, सपूत मातृभूमि के – रुको न शूर साहसी! …

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पानी और धुप: सुभद्रा कुमारी की देश प्रेम कविता

पानी और धुप: सुभद्रा कुमारी की देश प्रेम कविता

Here is a poem written by the famous poetess Subhadra Kumari Chauhan at the time of freedom struggle of India. It depicts the desire of a child to learn the use of sword to ward off policemen who come to arrest the freedom fighter ‘Kaka’. अभी अभी थी धूप, बरसने, लगा कहाँ से यह पानी। किसने फोड़ घड़े बादल के, …

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उठो स्वदेश के लिये: क्षेमचंद सुमन की देशभक्ति कविता

उठो स्वदेश के लिये – क्षेमचंद सुमन

Here is a great poem from which inspiration may be derived. Author is the well-known poet Kshem Chand Suman. उठो स्वदेश के लिये बने कराल काल तुम उठो स्वदेश के लिये बने विशाल ढाल तुम उठो हिमाद्रि श्रंग से तुम्हे प्रजा पुकारती उठो प्रशांत पंथ पर बढ़ो सुबुद्ध भारती जागो विराट देश के तरुण तुम्हें निहारते जागो अचल, मचल, विफल, …

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बढ़े चलो, बढ़े चलो: सोहनलाल द्विवेदी

बढ़े चलो, बढ़े चलो - सोहन लाल द्विवेदी

सोहन लाल द्विवेदी (22 फरवरी 1906 – 1 मार्च 1988) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे। ऊर्जा और चेतना से भरपूर रचनाओं के इस रचयिता को राष्ट्रकवि की उपाधि से अलंकृत किया गया। महात्मा गांधी के दर्शन से प्रभावित, द्विवेदी जी ने बालोपयोगी रचनाएँ भी लिखीं। 1969 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया था। न हाथ …

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विद्रोह: प्रसिद्ध नारायण सिंह जी की भोजपुरी कविता

विद्रोह - प्रसिद्ध नारायण सिंह

I recently visited Jhansi and as I am a great admirer or Rani Laxmibai, I went to see her palace, Jhansi Fort and museum. In the museum, I found a very nice poetry book related to the first freedom fight of India in 1857. In this book I found a truly remarkable poem in Bhojpuri, that immediately reminded me of …

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