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Tag Archives: India Hindi Poems

अरुण यह मधुमय देश हमारा: जय शंकर प्रसाद

अरुण यह मधुमय देश हमारा - जय शंकर प्रसाद

A lovely classic by Jai Shankar Prasad. Hindi is a bit difficult so I have provided the meanings of difficult words… अरुण यह मधुमय देश हमारा: जय शंकर प्रसाद अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहां पहुंच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा। सरस तामरस गर्भ विभा पर नाच रही तरुशिखा मनोहर छिटका जीवन हरियाली पर मंगल कुंकुम सारा। लघु सुरधनु …

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हिमाद्रि तुंग शृंग से: जय शंकर प्रसाद की देशप्रेम कविता

Jaishankar Prasad Inspirational Desh Bhakti Poem हिमाद्रि तुंग शृंग से

Here is an old classic inspirational poem by Jay Shankar Prasad. हिमाद्रि तुंग शृंग से: जय शंकर प्रसाद हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती – स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती – ‘अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो, प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!’ असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्यदाह-सी, सपूत मातृभूमि के – रुको न शूर साहसी! …

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पानी और धुप: सुभद्रा कुमारी की देश प्रेम कविता

पानी और धुप: सुभद्रा कुमारी की देश प्रेम कविता

Here is a poem written by the famous poetess Subhadra Kumari Chauhan at the time of freedom struggle of India. It depicts the desire of a child to learn the use of sword to ward off policemen who come to arrest the freedom fighter ‘Kaka’. अभी अभी थी धूप, बरसने, लगा कहाँ से यह पानी। किसने फोड़ घड़े बादल के, …

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उठो स्वदेश के लिये: क्षेमचंद सुमन की देशभक्ति कविता

उठो स्वदेश के लिये – क्षेमचंद सुमन

Here is a great poem from which inspiration may be derived. Author is the well-known poet Kshem Chand Suman. उठो स्वदेश के लिये बने कराल काल तुम उठो स्वदेश के लिये बने विशाल ढाल तुम उठो हिमाद्रि श्रंग से तुम्हे प्रजा पुकारती उठो प्रशांत पंथ पर बढ़ो सुबुद्ध भारती जागो विराट देश के तरुण तुम्हें निहारते जागो अचल, मचल, विफल, …

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बढ़े चलो, बढ़े चलो: सोहनलाल द्विवेदी

बढ़े चलो, बढ़े चलो - सोहन लाल द्विवेदी

सोहन लाल द्विवेदी (22 फरवरी 1906 – 1 मार्च 1988) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे। ऊर्जा और चेतना से भरपूर रचनाओं के इस रचयिता को राष्ट्रकवि की उपाधि से अलंकृत किया गया। महात्मा गांधी के दर्शन से प्रभावित, द्विवेदी जी ने बालोपयोगी रचनाएँ भी लिखीं। 1969 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया था। न हाथ …

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विद्रोह: प्रसिद्ध नारायण सिंह जी की भोजपुरी कविता

विद्रोह - प्रसिद्ध नारायण सिंह

I recently visited Jhansi and as I am a great admirer or Rani Laxmibai, I went to see her palace, Jhansi Fort and museum. In the museum, I found a very nice poetry book related to the first freedom fight of India in 1857. In this book I found a truly remarkable poem in Bhojpuri, that immediately reminded me of …

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हिमालय से भारत का नाता: गोपाल सिंह नेपाली

हिमालय से भारत का नाता - गोपाल सिंह नेपालीहिमालय से भारत का नाता - गोपाल सिंह नेपाली

Currently, we face confrontation on our northern border. China from across Himalaya is becoming aggressive. Here is an old and famous poem of Gopal Singh Nepali about the relationship of Himalaya with India. गोपाल सिंह नेपाली (Gopal Singh Nepali) का 11 अगस्त 1911 को बेतिया, पश्चिमी चम्पारन (बिहार) में जन्म हुआ। गोपाल सिंह नेपाली को हिन्दी के गीतकारों में विशेष …

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Ramdhari Singh Dinkar Old Classic Poem about Himalayas मेरे नगपति! मेरे विशाल!

Ramdhari Singh Dinkar Old Classic Poem about Himalayas मेरे नगपति! मेरे विशाल!

Here is excerpt from an old classic from Dinkar, exhorting Himalaya the great snow-covered king of mountains (Nagpati), that stands tall and eternally on the north of Indian subcontinent, to save India from its decline. The poem seems to have been written while India was under captivity of the English. मेरे नगपति! मेरे विशाल!: रामधारी सिंह दिनकर मेरे नगपति! मेरे विशाल! …

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झाँसी की रानी: सुभद्रा कुमारी चौहान की वीर रस कविता

Subhadra Kumari Chauhan Veer Ras Hindi Poem झाँसी की रानी

Subhadra Kumari Chauhan has authored a number of popular works in Hindi poetry. Her most famous composition is Jhansi Ki Rani, an emotionally charged poem describing the life of Rani Lakshmi Bai. The poem is one of the most recited and sung poems in Hindi literature. This and her other poems, Veeron Ka Kaisa Ho Basant, Rakhi Ki Chunauti, and …

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दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे: बाल-कविता

Diwali Festival Hindi Bal Kavita दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे

दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दिवाली रे, खुशी-खुशी सब हंसते आओ, आज दिवाली रे। मैं तो लूंगा खेल-खिलौने, तुम भी लेना भाई, नाचो, गाओ, खुशी मनाओ, आज दिवाली आई। आज पटाखे खूब चलाओ, आज दिवाली रे, दीप जलाओ, दीप जलाओ, आज दिवाली रे। नए-नए मैं कपड़े पहनूं, खाऊं खूब मिठाई, हाथ जोड़कर पूजा कर लूं आज दिवाली आई। खाओ मित्रों, …

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