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Tag Archives: Hindi Songs on Culture And Traditions

Navratri Songs with lyrics: Navratri Videos

Navratri Songs

Navratri – the nine nights of worshiping, devotion and celebration – is observed throughout the country and every region has a unique way of celebrating it. Despite the difference in the mode of celebration, the word Navratri at once brings to our mind Goddess Durga, lights, devotional music, crowded puja venue full of smiling faces, people dancing to the beats …

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चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है: नरेन्द्र चंचल

Narendra Chanchal Jai Mata Di Bhajan चलो भुलावा आया है माता ने बुलाया है

Avtaar is a 1983 film starring Rajesh Khanna and Shabana Azmi. It was directed by Mohan Kumar, and the music was by Laxmikant Pyarelal. Rajesh Khanna did achieve success from Amardeep and Prem Bandhan onwards, but this was Rajesh Khanna’s biggest hit film in terms of box office collections after his bad phase from 1976 to 1978. Avtaar was a …

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मच गया शोर सारी नगरी रे: दही हांडी फ़िल्मी गीत

Bollywood Janmashtami Hindi Song मच गया शोर सारी नगरी रे

मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे आया बिरज का बांका, संभाल तेरी गगरी रे हो.. आया बिरज का बांका संभाल तेरी गगरी रे – 2 देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए अरे धमकता है इतना तू किसको डरता है कौन आने दे उसको ऐसे न बहुत बोलो मत …

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राधा कैसे ना जले: जावेद अख्तर हिंदी फ़िल्मी गीत

राधा कैसे ना जले - जावेद अख्तर

राधा कैसे ना जले: लगान मधुबन में जो कन्हैया किसी गोपी से मिले कभी मुस्काये, कभी च्छेदे, कभी बात करे राधा कैसे ना जले, राधा कैसे ना जले आग टन मॅन में लगे राधा कैसे ना जले, राधा कैसे ना जले मधुबन में भले कान्हा किसी गोपी से मिले मॅन में तो राधा के ही प्रेम के हैं फूल खिले …

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बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है: इन्दीवर

Raksha Bandhan Top Bollywood Song बहना ने भाई की कलाई से प्यार बाँधा है

Resham Ki Dori (1974) Movie Plot: Ajit and Rajoo become orphans. Ajit, as the older brother takes care of his younger sister, at great personal sacrifice. When he tries to save his sister from sexual assault, death occurs. Is Ajit responsible? He emerges as Vinod from jail. In English the loose translation of the title would be “a silken thread” …

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अपनी आज़ादी को हम हरगीज मिटा सकते नहीं: शकील बदायूँनी

शकील बदायूँनी (जन्म: 03 अगस्त, 1916 – निधन: 20 अप्रैल, 1970) – शकील बदायूनी का जन्म स्थान उत्तर प्रदेश का शहर बदायूँ है। यह एक उर्दू के शायर और साहित्यकार थे। लेकिन इन्होंने बालीवुड में गीत रचनाकार के रूप में नाम कमाया। अपनी आज़ादी को हम हरगीज मिटा सकते नहीं: शकील बदायूँनी अपनी आज़ादी को हम हरगीज मिटा सकते नहीं …

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ऐसा देस है मेरा: जावेद अख्तर का लोकप्रिय फ़िल्मी देश भक्ति गीत

ऐसा देस है मेरा - जावेद अख्तर

जावेद अख़्तर का नाम भारत देश का बहुत ही जाना-पहचाना नाम हैं। जावेद अख्तर शायर, फिल्मों के गीतकार और पटकथा लेखक तो हैं ही, सामाजिक कार्यकर्त्ता के रूप में भी एक प्रसिद्ध हस्ती हैं। इनका जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था। पिता जाँ निसार अख़्तर प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि और माता सफिया अखतर मशहूर उर्दु लेखिका तथा शिक्षिका …

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जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा: राजेंद्र कृष्ण

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा: राजेंद्र कृष्ण

राजेंद्र कृष्ण के गीतों का सफ़र ‘प्यार की शमा को तकदीर बुझाती क्यूं है किसी बर्बादे-मोहब्बत को सताती क्यूं है’। और 1948 में बनी फ़िल्म प्यार की जीत में क़मर जलालाबादी और राजेंद्र कृष्ण के गीत थे। राजेंद्र का यह गीत बहुत मकबूल हुआ ‘तेरे नैनों ने चोरी किया मेरा छोटा सा जिया परदेसिया’। 1948 में ‘बापू की यह अमर …

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सुनो गौर से दुनिया वालो: समीर का देशभक्ति फ़िल्मी गीत

सुनो गौर से दुनिया वालो - समीर

समीर हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इनके ज्यादातर गीत हिट हुए और इनके द्वारा लिखें गए गीत आज भी लोगोंं की जुबानोंं पर हैं। उनके पिता अनजान भी गीतकार रहे थे। उनके पास सबसे अधिक गीत लिखने का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स है। उन्होंने लगभग 650 फिल्मों में 4000 गाने से अधिक लिखे हैं। उन्हें यश भारती पुरस्कार भी …

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मोहे तू रंग दे बसंती: प्रसून जोशी का जोश भर देने वाला फ़िल्मी गीत

मोहे तू रंग दे बसंती - प्रसून जोशी

प्रसून जोशी के “कुछ कर गुज़रने” की शुरुआत पहाड़ों से हुई। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में 1971 में जन्म हुआ। पिता पीसीएस अफसर थे। मां क्लासिकल सिंगर। मां-पिता दोनों की संगीत में दिलचस्पी थी। एक इंटरव्यू में प्रसून ने कहा था, “पिता पीसीएस अधिकारी थे तो देर रात तक लाइब्रेरी खुलवाए रखने में दिक्कत नहीं होती थी। सुबह नींद मां के रियाज़ …

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