Tag Archives: Hindi Poems on Culture and Traditions

माँ का रूप: माँ पर विद्यार्थियों और बच्चों के लिए हिंदी कविता

माँ का रूप - शाहीन अवस्थी Mother's Day Special Hindi Poem

हर एक के जीवन में माँ एक अनमोल इंसान के रुप में होती है जिसके बारे शब्दों से बयाँ नहीं किया जा सकता है।ऐसा कहा जाता है कि भगवान हर किसी के साथ नहीं रह सकता इसलिए उसने माँ को बनाया हालाँकि माँ के साथ कुछ महत्वपूर्ण क्षणोँ को वर्णित किया जा सकता है। एक माँ हमारे जीवन की हर …

Read More »

माँ भूखी रहती है: माँ पर हिंदी कविता

माँ भूखी रहती है Mother's Day Special Hindi Poem

इस दुनिया में किसी भी चीज को माँ के सच्चे प्यार और परवरिश से नहीं तौला जा सकता। वो हमारे जीवन की एकमात्र ऐसी महिला है जो बिनी किसी मंशा के अपने बच्चे को ढ़ेरा सारा प्यारा परवरिश देती है। एक माँ के लिये बच्चा ही सबकुछ होता है। जब हम मजबूर होते है तो वो हमेशा जीवन में किसी …

Read More »

बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया: आनंद बक्षी का मदर्स डे स्पेशल गाना

बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया - आनंद बक्षी Mothers Day Filmi Song

बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया का करे यशोदा मैय्या – 2 ढूंढें री अखियाँ उसे चहू ओर जाने कहाँ छुप गया नंदकिशोर उड़ गया जैसे पुरवय्या का करे यशोदा मैय्या आ तोहे मैं गले से लगा लूं लागे ना किसी की नज़र, मन में छूपा लूं धूप जगत है रे ममता है छैय्या का करे यशोदा मैय्या मेरे जीवन …

Read More »

फिर एक बार: महादेवी वर्मा की देशभक्ति कविता

फिर एक बार - महादेवी वर्मा

Here is a poem by the well-known poetess Mahadevi Varma, showing her deep devotion and appreciation of the motherland. मैं कम्पन हूँ तू करुण राग मैं आँसू हूँ तू है विषाद मैं मदिरा तू उसका खुमार मैं छाया तू उसका अधार मेरे भारत मेरे विशाल मुझको कह लेने दो उदार फिर एक बार, बस एक बार कहता है जिसका व्यथित …

Read More »

बाल-कविताओं का संग्रह: ओमप्रकाश बजाज (भाग 2)

ओमप्रकाश बजाज की बाल-कविताओं का संग्रह

खिचड़ी: ओमप्रकाश बजाज चावल-दाल मिला कर बनती, खिचड़ी घर में सब को भाती। रोगी को डॉक्टर खाने को कहते, हल्की गिजा वे इसे मानते। घी और मसालों का छौंक लगा कर, छोटे-बड़े सब शौक से खाते। बीरबल की खिचड़ी पकाना कहलाती, जब किसी काम में अधिक देर हो जाती। घी खिचड़ी में ही तो रहा, तब कहा जाता, जब घर …

Read More »

हो हल्ला है होली है: प्रभुदयाल श्रीवास्तव – होली विशेष हिंदी बाल-कविता

होली विशेष हिंदी बाल-कविता: हो हल्ला है होली है

उड़े रंगों के गुब्बारे हैं, घर आ धमके हुरयारे हैं। मस्तानों की टोली है, हो हल्ला है, होली है। मुंह बन्दर सा लाल किसी का, रंगा गुलाबी भाल किसी का। कोयल जैसे काले रंग का, पड़ा दिखाई गाल किसी का। काना फूसी कुछ लोगों में, खाई भांग की गोली है। ढोल ढमाका ढम ढम ढम ढम, नाचे कूदे फूल गया …

Read More »

होली आई रे होली आई रे: होली के त्यौहार पर बाल-कवितायेँ

होली आई रे होली आई रे 3 Short Poems on Holi Festival

होली आई रे बसंत में हर कली मुस्कुराई, फागुन की मस्ती चंहुओर है छाई, मदभरा रंगीं नजारा हर कहीं नजर आता है, सुनहरा रंग फिजाओं में पसर जाता है, चंग की ढाप चौक-चौराहों में गूंज रही है, फागणियों को फाग गाने की सूझ रही है, लोग-लुगाई होली की मस्ती में सराबोर हैं, हर तरफ होली आई रे होली आई रे …

Read More »

दुनिया रंग-बिरंगी: होली के त्यौहार पर हिंदी बाल-कविता

Holi festival coloring pages

नीले, पीले और गुलाबी लाल, हरे, नारंगी, हुई रंगों से देखो सारी दुनिया रंग-बिरंगी। गालों पर गुलाल की रंगत रंग बिखेरे सूंदर, दौड़ रहे लेकर पिचकारी रामु, श्यामू, चंदर। बांट रही हैं गुझिया सबको मीठी खुशियां प्यारी, होली की मस्ती में देखो हँसती दुनिया सारी। भांति-भांति के रंग भरे सब मार रहे पिचकारी, रंग-बिरंगे लोग लग रहे ज्यो सूंदर फुलवारी। …

Read More »

बाल-कविताओं का संग्रह: ओमप्रकाश बजाज

ओमप्रकाश बजाज की बाल-कविताओं का संग्रह

सात बहनें: ओमप्रकाश बजाज भारत के पर्वोत्तर में 7 राज्य हैं जो ‘सात बहनें’ कहे जाते हैं। इनके नाम अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम कहलाते हैं। अरुणाचल कहलाता है उगते सूर्य का पर्वत और ईटागर है इसकी राजधानी। दिसपुर है असम की राजधानी, मेघालय की राजधानी शिलांग है, कोहिमा नागालैंड की और इंफाल मणिपुर की राजधानी है। …

Read More »