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Tag Archives: Hindi Poems on Courage

नानक दुखिया सब संसार: जैमिनी हरियाणवी की हास्य कविता

नानक दुखिया सब संसार: जैमिनी हरियाणवी की हास्य कविता

Gautam Buddha said that this world is a world of sorrows. Here Guru Nanak is saying the same. Except for few illusory moments of mirth, rest of the life is a struggle and frustration. नानक दुखिया सब संसार बूढ़ा बाप पड़ा बीमार माँ की बेटे से तकरार इस का रुठ गया है यार नानक दुखिया सब संसार गुंडा लेकर हुआ …

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अम्बर की एक पाक सुराही: अमृता प्रीतम

Amrita Pritam

Here is a nice poem of Amrita Pritam based upon which a lovely song was composed for film Kadambari (1975) that was sung by Asha Bhonsle. The song differs significantly from the actual poem below. This had to be done to bring the lines into meter. The last stanza we hear in the song is not there in the poem …

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भये प्रगट कृपाला: तुलसीदास द्वारा रचित श्री राम स्तुति

भये प्रगट कृपाला - गोस्वामी तुलसीदास

भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मनहारी, अद्भुत रूप विचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी॥ भावार्थ: दीनों पर दया करने वाले, कौसल्या के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए। मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करके माता हर्ष से भर गई। नेत्रों को …

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गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे हिंदी अनुवाद के साथ

तुलसीदास जी के दोहे

गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे अर्थ सहित (Tulisdas Ke Dohe With Meaning in Hindi) गोस्वामी तुलसीदास (जन्म- 1532 ई. – मृत्यु- 1623 ई.) हिन्दी साहित्य के आकाश के परम नक्षत्र, भक्तिकाल की सगुण धारा की रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि है। तुलसीदास एक साथ कवि, भक्त तथा समाज सुधारक तीनों रूपों में मान्य है। श्रीराम को समर्पित ग्रन्थ श्रीरामचरितमानस वाल्मीकि …

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वीर सिपाही: श्याम नारायण पाण्डेय की वीर रस कविता

Maharana Pratap Jayanti

Here is another excerpt from “” the great Veer-Ras Maha-kavya penned by Shyam Narayan Pandey. Here is a description of a soldier fighting for the Motherland. वीर सिपाही: वीर रस कविता भारत-जननी का मान किया, बलिवेदी पर बलिदान किया अपना पूरा अरमान किया, अपने को भी कुर्बान किया रक्खी गर्दन तलवारों पर थे कूद पड़े अंगारों पर, उर ताने शर-बौछारों पर …

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लक्ष्य: योगी सारस्वत – हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता

लक्ष्य: योगी सारस्वत - हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता

डॉ. कलाम कहते थे – जिंदगी बदलनी है तो बड़े लक्ष्य रखो, छोटे लक्ष्य तो अपराध हैं लक्ष्य: योगी सारस्वत लक्ष्य हमेशा बड़े रखो, लक्ष्य पर हमेशा चले-चलो। संभव है इसमें बाधाएं भी आएं, पर बाधाओं से लड़ते चलो॥ लक्ष्य हमेशा बड़े रखो॥ कोई गरीब है तो कोई अमीर, पर सबकी अपनी-अपनी तकदीर। हर मंजिल तुमको अपनी मिल जायेगी, गर …

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Motivational Hindi Poem on Blood Donation रक्तदान है महादान

Motivational Hindi Poem on Blood Donation रक्तदान है महादान

रक्तदान है महादान नही कोई आम दान रक्तदान है महादान।। मिलता इससे नर को नव जीवन दान मिलती उसके स्वप्नो को नव उमंग देखे थे स्वप्न नर ने मातृभूमि की सेवा के परन्तु दुर्घटनावश अधर में अटके हैं उसके प्राण रक्त ने दिया उसे नव जीवन दान रक्तदान है महादान नहीं कोई आम दान रक्तदान है महादान |1| पूज्य स्वामी विवेकानन्द …

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जब इस धरती पर राजपूत आया: राजपूतों का शौर्य गान

जब इस धरती पर राजपूत आया: राजपूतों का शौर्य गान

राजपूत भारतीय उपमहाद्वीप की बहुत ही प्रभावशाली जाति है, जो शासन और सत्ता के सदैव निकट रही है। अपनी युद्ध-कुशलता और शासन-क्षमता के कारण राजपूतों ने पर्याप्त ख्याति अर्जित की। राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल माना जाता है जो कि ‘राजपुत्र’ का अपभ्रंश है। राजस्थान को ब्रिटिशकाल में ‘राजपुताना’ भी कहा गया है। ‘Rajput’ is derivative of a …

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पन्ना दाई: सत्य नारायण गोयनका की वीर रस कविता

पन्ना दाई - सत्य नारायण गोयंका

Panna Dhai (also spelled Panna Dai “पन्ना दाई“) was a 16th-century nursemaid to Udai Singh II, the fourth son of Maharana Sangram Singh (12 April 1484 – 17 March 1527). Her name, Panna means emerald, and dai means a nurse in Hindi language. She had been given charge of young Udai Singh, breastfeeding him virtually from his birth in 1522, along …

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गोरा बादल: पंडित नरेंद्र मिश्र की वीर रस हिंदी कविता

गोरा-बादल: पंडित नरेंद्र मिश्र की वीर रस हिंदी कविता

दोहराता हूँ सुनो रक्त से लिखी हुई क़ुरबानी। जिसके कारन मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी।। रावल रत्न सिंह को छल से कैद किया खिलजी ने काल गई मित्रों से मिलकर दाग किया खिलजी ने खिलजी का चित्तोड़ दुर्ग में एक संदेशा आया जिसको सुनकर शक्ति शौर्य पर फिर अँधियारा छाया दस दिन के भीतर न पद्मिनी का डोला यदि आया …

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