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Tag Archives: Hindi Poems on Compromise

युगावतार गांधी: सोहनलाल द्विवेदी

Hindi Poem about Father of the Nation - Mahatma Gandhi युगावतार गांधी

चल पड़े जिधर दो डग, मग में चल पड़े कोटि पग उसी ओर, पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि पड़ गए कोटि दृग उसी ओर। जिसके शिर पर निज धरा हाथ उसके शिर-रक्षक कोटि हाथ, जिस पर निज मस्तक झुका दिया झुक गए उसी पर कोटि माथ॥ हे कोटिचरण, हे कोटिबाहु, हे कोटिरूप, हे कोटिनाम, तुम एकमूर्ति, प्रतिमूर्ति कोटि हे …

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तुम्हें नमन: सोहनलाल द्विवेदी की प्रेरणादायक कविता

तुम्हें नमन - सोहनलाल द्विवेदी

Albert Einstein said about him, “Generations to come will scarcely believe that such a one as this walked the earth in flesh and blood”. What a phenomenon our Father of the nation was! He took on an empire about which it was said that the “sun never sets on it”, and lead a whole subcontinent to freedom. That too while …

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जानते हो क्या क्या छोड़ आये: राज कुमार

जानते हो क्या क्या छोड़ आये: राज कुमार

Dr. Raj Kumar is a retired Indian professor of psychiatry. He is also a poet of an era bygone. I enjoyed hearing some of his poems in person. Here is a sample poem that exhorts those who left home in pursuit of riches, to return home. एक चिट्ठी, कुछ तस्वीरें लाया हूँ देखोगे? दिखलाऊँ? बूझोगे? बतलाऊँ? जानते हो क्या क्या …

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उठो स्वदेश के लिये: क्षेमचंद सुमन की देशभक्ति कविता

उठो स्वदेश के लिये – क्षेमचंद सुमन

Here is a great poem from which inspiration may be derived. Author is the well-known poet Kshem Chand Suman. उठो स्वदेश के लिये बने कराल काल तुम उठो स्वदेश के लिये बने विशाल ढाल तुम उठो हिमाद्रि श्रंग से तुम्हे प्रजा पुकारती उठो प्रशांत पंथ पर बढ़ो सुबुद्ध भारती जागो विराट देश के तरुण तुम्हें निहारते जागो अचल, मचल, विफल, …

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बढ़े चलो, बढ़े चलो: सोहनलाल द्विवेदी

बढ़े चलो, बढ़े चलो - सोहन लाल द्विवेदी

सोहन लाल द्विवेदी (22 फरवरी 1906 – 1 मार्च 1988) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे। ऊर्जा और चेतना से भरपूर रचनाओं के इस रचयिता को राष्ट्रकवि की उपाधि से अलंकृत किया गया। महात्मा गांधी के दर्शन से प्रभावित, द्विवेदी जी ने बालोपयोगी रचनाएँ भी लिखीं। 1969 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया था। न हाथ …

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विद्रोह: प्रसिद्ध नारायण सिंह जी की भोजपुरी कविता

विद्रोह - प्रसिद्ध नारायण सिंह

I recently visited Jhansi and as I am a great admirer or Rani Laxmibai, I went to see her palace, Jhansi Fort and museum. In the museum, I found a very nice poetry book related to the first freedom fight of India in 1857. In this book I found a truly remarkable poem in Bhojpuri, that immediately reminded me of …

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हल्दीघाटी: पंचदश सर्ग – श्याम नारायण पाण्डेय

हल्दीघाटी: पंचदश सर्ग - श्याम नारायण पाण्डेय

Shyam Narayan Pandey (1907 – 1991) was an Indian poet. His epic Jauhar, depicting the self-sacrifice of Rani Padmini, a queen of Chittor, written in a folk style, became very popular in the decade of 1940-50. पंचदश सर्ग: सगपावस बीता पर्वत पर नीलम घासें लहराई। कासों की श्वेत ध्वजाएं किसने आकर फहराई? ॥१॥ नव पारिजात–कलिका का मारूत आलिंगन करता कम्पित–तन …

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वीर सिपाही: श्याम नारायण पाण्डेय की वीर रस कविता

Maharana Pratap Jayanti

Here is another excerpt from “Haldighaati” the great Veer-Ras Maha-kavya penned by Shyam Narayan Pandey. Here is a description of a soldier fighting for the Motherland. वीर सिपाही: वीर रस कविता भारत-जननी का मान किया, बलिवेदी पर बलिदान किया अपना पूरा अरमान किया, अपने को भी कुर्बान किया रक्खी गर्दन तलवारों पर थे कूद पड़े अंगारों पर, उर ताने शर-बौछारों पर …

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जनतंत्र का जन्म: रामधारी सिंह दिनकर

जनतंत्र का जन्म: रामधारी सिंह दिनकर

In view of the current crusade of Anna Hazare against corruption, this poem about the power of masses becomes a must read. Dinkar Ji wrote this beautiful poem when India became a Republic on January 26, 1950. India‘s population was 33 Crores that time. From now on, it would be the meek people of the land who would collectively rule this …

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Suryakant Tripathi ‘Nirala’ Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनी

Suryakant Tripathi 'Nirala' Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनि

Here is an old classic by the famous poet Suryakant Tripathi Nirala. This lovely composition in chaste Hindi is a pleasure to sing loudly for its sheer rhythm and zing. On this Independence Day, this national poem should be shared by all. वर दे वीणावादिनी! वर दे। प्रिय स्वतंत्र–रव अमृत–मंत्र नव, भारत में भर दे। काट अंध–उर के बंधन–स्तर, बहा …

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