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Tag Archives: Frustration Poems for Students

Naqsh Faryadi: Mirza Ghalib Urdu Ghazal Lyrics

Naqsh Faryadi - Mirza Ghalib

Naqsh Faryadi: Mirza Ghalib – Urdu Script نقش فریادی ہے کس کی شوخیِ تحریر کا کاغذی ہے پیرہن ہر پیکرِ تصویر کا کاو کاوِ سخت جانیہاۓ تنہائی نہ پوچھ صبح کرنا شام کا لانا ہے جوۓ شیر کا جذبۂ بے اختیارِ شوق دیکھا چاہیے سینۂ شمشیر سے باہر ہے دم شمشیر کا آگہی دامِ شنیدن جس قدر چاہے بچھائے مدّعا …

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हल्दीघाटी: पंचदश सर्ग – श्याम नारायण पाण्डेय

हल्दीघाटी: पंचदश सर्ग - श्याम नारायण पाण्डेय

Shyam Narayan Pandey (1907 – 1991) was an Indian poet. His epic Jauhar, depicting the self-sacrifice of Rani Padmini, a queen of Chittor, written in a folk style, became very popular in the decade of 1940-50. पंचदश सर्ग: सगपावस बीता पर्वत पर नीलम घासें लहराई। कासों की श्वेत ध्वजाएं किसने आकर फहराई? ॥१॥ नव पारिजात–कलिका का मारूत आलिंगन करता कम्पित–तन …

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वीर सिपाही: श्याम नारायण पाण्डेय की वीर रस कविता

Maharana Pratap Jayanti

Here is another excerpt from “Haldighaati” the great Veer-Ras Maha-kavya penned by Shyam Narayan Pandey. Here is a description of a soldier fighting for the Motherland. वीर सिपाही: वीर रस कविता भारत-जननी का मान किया, बलिवेदी पर बलिदान किया अपना पूरा अरमान किया, अपने को भी कुर्बान किया रक्खी गर्दन तलवारों पर थे कूद पड़े अंगारों पर, उर ताने शर-बौछारों पर …

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दीपक जलाना कब मना है: हरिवंश राय बच्चन

दीप मेरे जल अकम्पित (दीप शिखा): महादेवी वर्मा

Calamities come in every one’s life. There could be death of a near and dear one or losing love of one’s life. Desperation may follow and everything may look dark and hopeless. Here Bachchan Ji tells in his inimitable style, it is fine to light a tiny lamp to dispel that darkness. It is OK to get up and re-connect …

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आई अब की साल दिवाली: कैफ़ी आज़मी

आई अब की साल दिवाली मुँह पर अपने खून मले - कैफ़ी आज़मी

आई अब की साल दिवाली मुँह पर अपने खून मले आई अब की साल दिवाली चारों तरफ़ है घोर अन्धेरा घर में कैसे दीप जले आई अब की साल दिवाली… बालक तरसे फुलझड़ियों को (दीपों को दीवारें – २) माँ की गोदी सूनी सूनी (आँगन कैसे संवारे – २) राह में उनकी जाओ उजालों बन में जिनकी शाम ढले आई …

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स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Love is the essence. As retreating water leaves the sand dry, so does lost love leave a person drained and lifeless. Here is a beautiful expression by Suryakant Tripathi Nirala. स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ स्नेह निर्झर बह गया है, रेत सा तन रह गया है। आम की यह डाल जो सूखी दिखी‚ कह रही है – अब …

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मानवता और धर्मयुद्ध (रश्मिरथी): रामधारी सिंह दिनकर

मानवता और धर्मयुद्ध (रश्मिरथी) - रामधारी सिंह दिनकर

Here is a gem taken from the all-time classic “Rashmirathi”. Dinkar Ji abhors the animal instincts that linger just under the surface of humanity. He abhors the glorification of war by the society. No right thinking human being would want the death and destruction that invariably occurs in a war, but still at times war gets all out support from societies. …

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राह कौन सी जाऊं मैं: अटल जी की चिंतन पर कविता

राह कौन सी जाऊं मैं: अटल जी की चिंतन पर कविता

There are dilemmas in life at every step. What to do? Which alternative to choose? And there are no authentic and correct answers. We must nonetheless make a choice. राह कौन सी जाऊं मैं: अटल बिहारी वाजपेयी चौराहे पर लुटता चीर‚ प्यादे से पिट गया वजीर‚ चलूं आखिरी चाल कि बाजी छोड़ विरक्ति रचाऊं मैं‚ राह कौन सी जाऊं मैं? …

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