Home » Tag Archives: Fatigue Poems for Children

Tag Archives: Fatigue Poems for Children

मेरा नया बचपन: सुभद्रा कुमारी चौहान की हिंदी कविता

सुभद्रा कुमारी चौहान

मेरा नया बचपन: सुभद्रा कुमारी चौहान की हिंदी कविता – We all miss our childhood. That carefree time of fun without worries never returns. We are for ever stuck with the grown up world of endless worries, apprehensions and ambitions. Here is a very famous poem of Subhadra Kumari Chauhan about that lovely childhood. सुभद्रा कुमारी चौहान हिन्दी की सुप्रसिद्ध …

Read More »

बचपन: Short Hindi Poetry about Childhood

बचपन - वंश - Short Hindi Poetry about Childhood

बचपन जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। इसमें इतनी चंचलता और मिठास भरी होती है कि हर कोई फिर से इसे जीना चाहता है। बचपन में वह धीरे-धीरे चलना, गिर पड़ना और फिर से उठकर दौड़ लगाना बहुत याद आता है। पिताजी के कंधे पर बैठकर मेला देखने का जो मजा होता था वह अब नहीं आता है। …

Read More »

बचपन ही अच्छा था: WhatsApp से ली गयी कविता

बचपन ही अच्छा था

हम अक़सर कहते हैं, बचपन ही अच्छा था। कोई बड़ी परेशानी आती है और हमें किसी कारणवश उसका समाधान नहीं मिलता, तो यही भावना आती है, ‘बचपन ही अच्छा था’। अगर मैं अपनी बात करूं, तो मुझे तो कभी-कभी बच्चों से जलन भी होने लगती है। बचपन ही अच्छा था: WhatsApp से ली गयी कविता पूरी स्कूल लाईफ में सुबह˗सुबह …

Read More »

माँ: ओम व्यास ओम – माँ पर मार्मिक कविता

माँ - ओम व्यास ओम

माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है माँ, माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है माँ। माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है माँ, माँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है माँ। माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है माँ, माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है माँ। माँ आँखों का सिसकता हुआ किनारा …

Read More »

दुनिया जगर-मगर है कि मजदूर दिवस है: हिंदी कविता

दुनिया जगर-मगर है कि मजदूर दिवस है - ओमप्रकाश यती

एक मई को दुनिया के कई देशों में लेबर डे मनाया जाता है और इस दिन देश की लगभग सभी कंपनियों में छुट्टी रहती है। भारत ही नहीं दुनिया के करीब 80 देशों में इस दिन राष्‍ट्रीय छुट्टी होती है। हालांकि इस साल हरियाणा सरकार ने लेबर डे नहीं मनाने का फैसला किया है। भारत में मजदूर दिवस कामकाजी लोगों …

Read More »

They Earned The Right: Labour Day Poetry

They Earned The Right - Labour Day Poetry in English

Edgar Albert Guest was a prolific English-born American poet who was popular in the first half of the 20th century and became known as the People’s Poet. His poems often had an inspirational and optimistic view of everyday life. Labour Day Poem For Students And Children: They Earned The Right I knew Ket and Knudsen, Zeller, Zeder and Breer. I …

Read More »

जानते हो क्या क्या छोड़ आये: राज कुमार

जानते हो क्या क्या छोड़ आये: राज कुमार

Dr. Raj Kumar is a retired Indian professor of psychiatry. He is also a poet of an era bygone. I enjoyed hearing some of his poems in person. Here is a sample poem that exhorts those who left home in pursuit of riches, to return home. एक चिट्ठी, कुछ तस्वीरें लाया हूँ देखोगे? दिखलाऊँ? बूझोगे? बतलाऊँ? जानते हो क्या क्या …

Read More »

अपने ही मन से कुछ बोलें: अटल की आत्म चिंतन कविता

अपने ही मन से कुछ बोलें - अटल बिहारी वाजपेयी

Atal Jis poems have special significance. He was leader of a country of one billion people; a seasoned politician who would have seen all that is to be seen on this earth. It is admirable that he retained the sensitivity of heart as a poet too, a member of the rare breed of philosopher kings. I was specially moved by …

Read More »

दो अनुभूतियाँ: अटल जी की मानव मनोदशा पर कविताएँ

दो अनुभूतियाँ: अटल बिहारी वाजपेयी

In most human endeavors, there are ups and downs. But in the field of politics, downswings can be brutal and up-swings full of elation and optimism. Two poems of Atal Ji reflect beautifully on this roller coaster. First one appears to have been written in a phase of disillusionment and dejection when the poet’s heart says, “I won’t sing any …

Read More »