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Tag Archives: Compromise Poems for Students

अपराधी कौन: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की देश प्रेम कविता

Hindi Poem on Desh Prem / Frustration अपराधी कौन - रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भारत में हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि …

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भये प्रगट कृपाला: तुलसीदास द्वारा रचित श्री राम स्तुति

भये प्रगट कृपाला - गोस्वामी तुलसीदास

भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मनहारी, अद्भुत रूप विचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी॥ भावार्थ: दीनों पर दया करने वाले, कौसल्या के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए। मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करके माता हर्ष से भर गई। नेत्रों को …

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गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे हिंदी अनुवाद के साथ

तुलसीदास जी के दोहे

गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे अर्थ सहित (Tulisdas Ke Dohe With Meaning in Hindi) गोस्वामी तुलसीदास (जन्म- 1532 ई. – मृत्यु- 1623 ई.) हिन्दी साहित्य के आकाश के परम नक्षत्र, भक्तिकाल की सगुण धारा की रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि है। तुलसीदास एक साथ कवि, भक्त तथा समाज सुधारक तीनों रूपों में मान्य है। श्रीराम को समर्पित ग्रन्थ श्रीरामचरितमानस वाल्मीकि …

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छोटा चूहा: पूर्णिमा वर्मन की हास्यप्रध बाल-कविता

छोटा चूहा: पूर्णिमा वर्मन की हास्यप्रध बाल-कविता

चूहा एक स्तनधारी प्राणी है। यह साधारणतः सभी देशों में विशेषकर उष्ण देशों में पाया जाता है। यह कपड़ा, सूटकेश आदि को काटकर बहुत हानि पहुँचाता है। शरीर बालों से आवृत एवं सिर, गर्दन, धड़ तथा पूँछ में विभक्त होता है। ऊपरी एवं निचली ओठ से घिरा रहता है। सिर में एक जोड़ा नेत्र, दो बाह्यकर्ण, धड़ में दो जोड़े पैर …

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दोस्ती पर समर्पित कविता: दोस्ती की मिसाल रखियेगा

दोस्ती पर समर्पित हिंदी कविता: दोस्ती की मिसाल रखियेगा

दोस्ती पर कविता में पढ़िए एक दोस्त की जिंदगी में क्या अहमियत होती है। दोस्त ही तो वो शख्स होता है जिसके साथ हम अपने दिल की वो बातें कर सकते हैं जो हम किसी और से नहीं कर सकते। दोस्त एक मान की तरह प्यार देता है। पिता की तरह डांटता है और भाई की तरह ख्याल रखता है। …

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दोस्ती के नाम एक कविता: सब दोस्त थकने लगे है

दोस्ती के नाम एक कविता: सब दोस्त थकने लगे है

यूं तो रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे कई दोस्त होते हैं, जिनमें कुछ खास, तो कुछ आम होते हैं। दोस्ती भी सबसे अलग-अलग होती है। कभी सिर्फ हाय-हैलो, कभी काम चलाउ, कभी खट्टी-मीठी नमकीन, तो कभी सतरंगी रंगों से सजी दुनिया सी…। सब दोस्त थकने लगे है: खूबसूरत कविता दोस्ती के नाम साथ-साथ जो खेले थे बचपन में, वो सब …

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विजयी के सदृश जियो रे: रामधारी सिंह दिनकर

Why did India need to bury Netaji Subhash Chandra Bose before his death?

World is run by people who live a life full of actions. Geeta teaches Karma-yoga to us. The same thought prevails in this poem by Dinkar. It is one of those poems that fill us with enthusiasm and a will to achieve some thing in life. Only Ramdhari Singh Dinkar can exhort like this. A lovely poem indeed. दिनकर जी …

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कुँआरी मुट्ठी: कन्हैया लाल सेठिया वीर रस कविता

कुँआरी मुट्ठी: कन्हैया लाल सेठिया वीर रस कविता

War has an important role in Nation building. A nation that has not experienced war becomes weaker. War ensures peace. This is the perspective on war provided by the well-known poet Kanhaiyalal Sethia. युद्ध नहीं है नाश मात्र ही युद्ध स्वयं निर्माता है, लड़ा न जिस ने युद्ध राष्ट्र वह कच्चा ही रह जाता है, नहीं तिलक के योग्य शीश …

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हरिवंश राय बच्चन वीर रस देश प्रेम कविता: रुके न तू

हरिवंश राय बच्चन वीर रस देश प्रेम कविता: रुके न तू

Here is an exhortation from Harivansh Rai Bachchan to leave inaction and to work with full enthusiasm and vigor. A good poem for children to recite. धरा हिला, गगन गुँजा नदी बहा, पवन चला विजय तेरी, विजय तेरीे ज्योति सी जल, जला भुजा–भुजा, फड़क–फड़क रक्त में धड़क–धड़क धनुष उठा, प्रहार कर तू सबसे पहला वार कर अग्नि सी धधक–धधक हिरन …

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वीर सिपाही: श्याम नारायण पाण्डेय की वीर रस कविता

Maharana Pratap Jayanti

Here is another excerpt from “” the great Veer-Ras Maha-kavya penned by Shyam Narayan Pandey. Here is a description of a soldier fighting for the Motherland. वीर सिपाही: वीर रस कविता भारत-जननी का मान किया, बलिवेदी पर बलिदान किया अपना पूरा अरमान किया, अपने को भी कुर्बान किया रक्खी गर्दन तलवारों पर थे कूद पड़े अंगारों पर, उर ताने शर-बौछारों पर …

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