Home » Stories For Kids » Stories in Hindi » नन्हे बच्चों के लिए हिंदी बाल-कहानियाँ
How To Draw Cat

नन्हे बच्चों के लिए हिंदी बाल-कहानियाँ

दादी और नानी की मीठी कहानियों का संसार इतना सुंदर और लुभावना है कि बाल-मन उससे बाहर निकलना ही नहीं चाहता। हर बालक यही चाहता है कि कहानी (छोटे बच्चों की कहानियां) बस चलती ही जाए। हर रात, सोने से पहले, नानी या दादी की गोदी में सिर रखकर कहानी सुनने की बातें कई बच्चों को परी-कथा जैसी लग सकती हैं। कहानियाँ, जो कि हमारे मन को सुंदर विचार दें, मस्तिष्क को कल्पना की ऊँची उड़ान दें और भावनाओं के जुड़ाव का माध्यम बन जाएँ… ऐसी ही कुछ कहानियाँ इस संकलन का हिस्सा हैं।

नटखट पूसी: मंजरी शुक्ला

पूसी एक काले रंग की प्यारी सी बिल्ली थी। उसकी आँखें हरे रँग की थी जो रोशनी पड़ने पर कंचे सी चमकती थी। उसे अपनी झबरीली पूँछ बहुत पसँद थी, और पूँछ गंदी होने के डर से वह कभी भी गंदी ज़मीन पर नहीं बैठती थी। पसँद तो उसे अपनी खूबसूरत आँखें भी आती, पर भला वह उन्हें कहाँ देख सकती थी। वह हमेशा नीटू के साथ ही रहती थी, क्योंकि नीटू उसे बहुत प्यार करता था। नीटू था तो आठवीं कक्षा में, पर वह हमेशा अपने से छोटे बच्चों और पूसी के साथ ही खेला करता था। पूसी तो जैसे उसकी जान थी। वह जितनी देर घर में रहता, उसे अपने साथ ही रखता। वह अपने हाथ से उसका काँच का कटोरा साफ़ करता, बिस्किट के टुकड़े कर उन्हें दूध में मिलाता और हर रविवार को पापा के साथ जाकर पूसी के लिए मछली लाता। पूसी भी दरवाज़े पर ही बैठकर उसका रास्ता तब तक देखती, जब तक नीटू लौटकर नहीं आता था। पर आजकल पूसी सबसे ज़्यादा खुश रहती थी क्योंकि नीटू कहानियों की एक किताब खरीद कर लाया था। नीटू ज़ोर-ज़ोर से उन कहानियों को पढ़ता और खूब हँसता। उससे भी ज़्यादा अगर कोई हँसता तो वह थी पूसी…

पूसी को कहानियाँ सुनने में बहुत मज़ा आता था। वह नीटू के पैर के पास बैठकर बहुत गौर से कहानियाँ सुनती और उसके बाद ज़मीन पर लोटकर खूब हँसती थी। कभी वह खुशी के मारे ज़मीन पर औंधी गिर कर लुढ़क जाती तो कभी दो पैरों पर चलने लगती। नीटू को भी उस की हरकतें देख कर बहुत मजा आता। आजकल बिल्लियों के ग्रुप में पूसी की पूछ बहुत बढ़ गई थी, क्योंकि जब भी वह उनसे मिलती तो अपने किस्से कहानियों का पिटारा खोलकर बैठ जाती और सभी बिल्लियाँ हँसते-हँसते दोहरी हो जाती। पर भला नीटू कैसे जान पाता कि पूसी हँस रही है। उसे तो जब पूसी, फ़र्श पर लोटती दिखती, तो उसे लगता कि पूसी की तबीयत ठीक नहीं है, तभी वह आजकल अजीबोगरीब हरकतें करती रहती है। पर ना तो नीटू का चिल्लाते हुए कहानियाँ पढ़ना बंद हुआ और ना ही पूसी का हँसते हुए फ़र्श पर लुढ़कना। एक शाम जब पूसी ने सर्कस के बिल्ले की दो पैर पर चलने वाली कहानी सुनी तो वह भी अचानक दो पैरों से चलने की कोशिश करने लगी। पूसी को दो पैरों पर चलता देख नीटू का मुँह खुला रह गया और उसके हाथ से किताब छूटकर ज़मीन पर जा गिरी।

नीटू ने तुरंत पूसी को गोद में उठाया और माँ को बताकर पड़ोस में रहने वाले अरोरा अँकल के यहाँ चला गया। अरोरा अँकल जानवरों के डॉक्टर थे और सभी जानवरों का इलाज बहुत ही प्यार और धैर्य के साथ करते थे। क्लीनिक के बाहर ही बोर्ड पर कुत्ते की बड़ी सी तस्वीर देखते ही पूसी डर के मारे नीटू की गोद में दुबक गई। नीटू ने प्यार से उसकी पीठ थपथपाई और क्लीनिक के अँदर गया। वहाँ उसने अँकल को एक बच्चे के साथ बात करते देखा। तभी अँकल की नज़र नीटू पर पड़ी और उन्होंने उसे मुस्कुराते हुए अपने पास आने का इशारा किया। एक मेज पर बैठी सफ़ेद बिल्ली के बगल में ही नीटू ने पूसी को बैठा दिया और अँकल के पास चला गया।

अँकल ने मुस्कुराते हुए पूछा – “क्या हो गया तुम्हारी शैतान पूसी को”?

तभी बच्चा उनसे बोला – “आप पहले मेरी बिल्ली के बारे में तो बताइये कि उसे क्या हो गया है। वह पूरे टाइम गुमसुम सी रहती है। हम लोग उसके साथ इतना खेलने की कोशिश करते है,पर वह चुपचाप पलंग के नीचे या कुर्सी के नीचे ही बैठी रहती है”।

अँकल ने बाहर बैठी उसकी बिल्ली को देखते हुए कहा – “मुझे खुद नहीं समझ में आ रहा है कि तुम्हारी बिल्ली ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है। मैंने उसका दो बार चेकअप किया है, पर वो तो मुझे कहीं से भी बीमार नहीं लग रही है”।

बाहर मेज पर बैठी पूसी थोड़ी देर तक तो चुपचाप बैठी रही, फ़िर उसे अजीब सा लगने लगा। उसे चुप रहने की आदत ही नहीं थी। वह शाँत बैठी सफ़ेद बिल्ली को अपने किस्से कहानियाँ सुनाने को बैचैन हो उठी। उसने सफ़ेद बिल्ली से बातचीत करना शुरू कर दी। पूसी को तो कहानियों की लगभग पूरी किताब याद थी, इसलिए उसने एक के बाद एक मज़ेदार किस्से सफ़ेद बिल्ली को सुनाने शुरू कर दिए। पहले तो सफ़ेद बिल्ली धीरे से मुस्कुराई, फ़िर उसे भी कहानियाँ बहुत पसँद आई। उसने खुलकर हँसना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वह भी पूसी के साथ ज़मीन पर कूद पड़ी और दोनों लोट-लोटकर हँसने लगी। पूसी ने सफ़ेद बिल्ली को सर्कस वाले बिल्ले की कहानी सुनाते हुए दो पैरों पर चलना शुरू कर दिया। सफ़ेद बिल्ली भी भला क्यों पीछे रहती, वो भी मटकते हुए दो पैरों पर चलने लगी।

अँकल ने बच्चे से पूछा – “क्या तुम इसी बिल्ली के बारें में बता रहे थे, जो बहुत सीधी है और हमेशा शाँति से चुपचाप बैठी रहती है”।

बच्चा हैरत से अपनी बिल्ली को देखे जा रहा था, जो पूसी के साथ मस्ती करते हुए इधर उधर लुढ़क रही थी और बार-बार औंधी होकर गिर रही थी। और नीटू… वह बेचारा अपना सिर पकड़े बैठा था, क्योंकि वह जानता था कि पूसी ने सफ़ेद बिल्ली को भी अपनी तरह शरारती बना दिया था।

डॉ. मंजरी शुक्ला

Check Also

4th of July Funny Short Story - Extended family cook-out

4th of July Funny Story: Extended family cook-out

One year, Jim’s family was having the “extended family” 4th of July cookout at their …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *