चाँद और लम्बू जिराफ़ की दोस्ती पर हिंदी बाल-कहानी

चाँद और लम्बू जिराफ़ की दोस्ती पर हिंदी बाल-कहानी

रोज़ की तरह आज फ़िर खेल-खेल में चाँद सितारों की आपस में लड़ाई हो गई थी। चाँद बेचारा क्या करता, वह एक तरफ़ अकेला पड़ जाता और ढेर सारे सितारे एक तरफ़… आख़िर चाँद रूठ गया और बोला – “मैं जा रहा हूँ, धरती की ओर…”

सितारे यह सुनकर घबरा गए। उन्होंने उसे बहुत मनाया। उसकी बड़ी खुशामद की, पर रूठा चाँद नहीं माना।

नन्हा सा चमकता हुआ सितारा चाँद की मनुहार करते हुए बोला – “हम लोग भले ही लड़ते हैं, झगड़ते हैं, पर कितने अच्छे दोस्त हैं। यहाँ से जाकर तो तुम बिलकुल अकेले पड़ जाओगे”।

पर नाराज़ चाँद फ़िर भी नहीं माना और चल दिया।

जैसे-जैसे वह नीचे आ रहा था, उसे बहुत खुशी हो रही थी। हरे भरे पेड़ पौधे, रंग बिरंगे फूल, ठंडी हवा जैसे उसे अपनी ओर खींच रही थी।

उसने मन ही मन सोचा – “अच्छा हुआ जो मेरी सितारों से लड़ाई हो गई वरना मैं कभी भी इतनी खूबसूरत चीजें देख ही नहीं पाता। कभी वह पीला फूल छूता तो कभी गुलाबी, कभी नीला तो कभी सफ़ेद। रात में चाँद जिस भी जगह से गुज़र रहा था, वहाँ चाँदनी बिखरती चली जा रही थी।

कहीं खरगोश उछल-कूद कर रहे थे तो कहीं गिलहरियाँ सरपट दौड़ रही थी। चाँद को यह सब देख कर बहुत मज़ा आ रहा था। बहुत देर से उड़ते हुए चाँद बहुत थक गया था और इसलिए वह एक पेड़ की डाली पर बैठ गया। तभी उधर से लंबू जिराफ़ निकला। लंबू ने चाँद को देखकर कोई चमकीली खाने वाली चीज़ समझा और उसने गर्दन ऊँची करके चाँद को काट लिया।

चाँद दर्द से बिलबिला उठा और घबराहट के मारे वहाँ से उड़ गया। चाँद को उड़ते देख कर लंबू को बहुत मज़ा आया।

लंबू चाँद के पीछे-पीछे भागा।

चाँद ने कहा – “मैं चाँद हूँ। आज पहली ही बार ज़मीन पर आया और तुमने मुझे काट लिया”।

लंबू बोला – “क्योंकि तुम पेड़ पर टंगे थे”।

“अगर तुम पेड़ पर चढ़ जाओ तो क्या तुम्हें काट लेना चाहिए”? चाँद चिढ़ते हुए बोला।

हा हा हा… लंबू जोरों से हँसा।

चाँद ने उसे गुस्से से देखा तो लंबू मासूमियत से बोला – “पेड़ों पर तो फल लगते हैं, जो खाए जाते हैं। मैंने सोचा, तुम कोई चमकीले फल हो”।

चाँद यह सुन कर हँस दिया और बोला – “तुम बहुत लंबे हो, इसलिए आसानी से सबसे ऊँची डाल तक, पहुँच भी गए”।

लंबू अपनी तारीफ़ सुनकर मुस्कुरा दिया।

“सुबह होने वाली है। अब मैं ऊपर जाता हूँ वरना सूरज आ जाएगा” चाँद ने कहा।

लंबू बोला – “पर अब मैं तुमसे कैसे मिलूंगा”?

“क्यों अब तुम्हें मुझे दोबारा काटना है क्या”? चाँद ने कहा।

“नहीं, नहीं… मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ” लंबू बोला।

चाँद बोला – “तुम जब भी मुझसे मिलना चाहो, इसी पेड़ के पास आकर मुझे पुकारना। तुम इतने लंबे हो जाओगे कि मुझसे आसमान तक आकर मिल सकोगे”।

लंबू यह सुन कर बहुत खुश हो गया और हँस दिया। चाँद उससे विदा लेकर आसमान की ओर बढ़ चला।

चाँद को आया देखकर सितारे बहुत खुश हो गए और उसे घेरकर बैठ गए। आसमान में जाकर चाँद ने सितारों को पेड़-पौधों, तितली, फूल और भी ना जाने कितनी सारी पृथ्वी लोक की बाते बताई पर सबसे ज्यादा बढ़ चढ़ कर बताया अपने दोस्त लंबू के बारे में…

सभी सितारे लंबू से मिलने के लिए उत्सुक हो उठे।

चाँद बोला – “वह जब भी मुझसे मिलना चाहेगा तो वह यहाँ तक पहुँच सकता है फिर मैं तुम सबको भी उससे मिलवा दूँगा”।

उधर लंबू को भी चाँद की बहुत याद आ रही थी इसलिए वह अगली ही रात को उस पेड़ के पास पहुँचा गया और चाँद की ओर देखते हुए बोला – “चाँद, मेरे दोस्त, मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ”।

चाँद ने तुरंत कुछ सुनहरे कण ऊपर से फेंके जिससे लंबू, लंबा ही होता चला गया… लंबा… बहुत लंबा… कुछ ही देर में वह इतना लंबा हो गया कि उसका मुँह बादलों के पार चाँद के पास पहुँच गया।

चाँद उसे देख कर बहुत खुश हो गया। लंबू को देखकर सितारे भी दौड़ते हुए उसके पास आ गए। जितना आश्चर्य सितारों को लंबू को देखकर हो रहा था, उससे ज्यादा आश्चर्य लंबू जगमगाते सितारों को देखकर कर रहा था।

लंबू चाँद के साथ बहुत देर बाते करता रहा। उसे जंगल के रंग-बिरंगे फूल, सुनहरी मछलियों वाली नदी और अपने दोस्तों के बारे में बताता रहा। सितारों को भी यह सब सुनने में बहुत मजा आ रहा था।

अगली रात को फ़िर से आने का कहकर लंबू पृथ्वी लोक पर जैसे ही लौटने को हुआ, चाँद ने उसके ऊपर कुछ चमकीले कण फेंके और उसका कद वापस छोटा होता चला गया। कुछ ही देर बाद वह जंगल में उसी पेड़ के पास आ गया।

एक रात जब लंबू चाँद के पास जा रहा था तो मोंटू बंदर उसे बहुत गौर से देख रहा था। पहले तो मोंटू को अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ, पर कई बार आखें मिचमिचाने के बाद भी जब उसे लंबू आसमान तक जाते हुए दिखा तो उसे विश्वास हो गया कि लंबू आसमान तक आ और जा सकता है। वह अगले ही दिन कूदता फाँदता हुआ उस पेड़ के पास पहुँचा और एक डाली के ऊपर बैठकर लंबू का रास्ता देखने लगा।

जब रात में लंबू पेड़ के पास आकर बोला – “मेरे दोस्त चाँद, मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है। मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ”।

तभी अचानक उसके ऊपर कुछ सुनहरे कण गिरे और लंबू का कद बढ़ने लगा। मोंटू तुरंत कूद कर उसकी पीठ पर बैठ गया।

लंबू मोंटू को देखकर सकपका गया और उसे अपने पीठ से गिराने की कोशिश करने लगा। पर मोंटू ने लंबू को बहुत कस कर पकड़ा हुआ था।

लंबू गिड़गिड़ाते हुए बोला – “तुम मत चलो। चाँद ने सिर्फ़ मुझे आने के लिए कहा है, क्योंकि वह मेरा दोस्त है”।

मोंटू बोला – “अगर तुमने मुझे गिराया तो मैं यह बात जंगल में सबको बता दूँगा और फ़िर पूरा जंगल तुम्हारी पीठ पर सवार हो जाएगा”।

यह सुनकर बेचारा सीधा-साधा लंबू बहुत घबरा गया और चुप हो गया।

जब लंबू बादलों को पार कर जब चाँद के पास पहुँचा तो मोंटू उछल कर खड़ा हो गया। चाँद के साथ साथ सभी सितारे मोंटू को देखकर देखकर हक्का-बक्का रह गए।

चाँद ने मोंटू की तरफ देखते हुए आश्चर्य से पूछा – “तुम यहाँ कैसे आ गए”?

लंबू ने चाँद को पूरी बात बताते हुए कहा – “यह मुझे डरा रहा था कि अगर मैं इसे अपने साथ नहीं लाया, यह पूरे जंगल हमारी दोस्ती के बारे में बता देगा”।

चाँद ने बंदर से कहा – “ठीक है, आज से तुम भी हमारे दोस्त हो। हमारे साथ खूब खेलो और ढेर सारी बातें करो। हम सबको बहुत अच्छा लगेगा”।

पर मोंटू बहुत शैतान था… इतना ज़्यादा शैतान कि जंगल में रहने वाले सभी जानवर उसको देखते ही इधर-उधर छिप जाते थे। मोंटू ने सोचा कि मैं अगर चाँद और सितारों वाली बात किसी को बताऊंगा तो कोई भी मेरी बात पर विश्वास नहीं करेगा। इसलिए उसने अपने पास रखा एक छोटा सा चाकू निकाला और उसने चाँद का एक कोना चाकू से काट दिया।

चाँद दर्द से तड़प उठा और दर्द से चीखता हुआ डर के मारे पीछे हट गया।

बेचारा लंबू भी चाँद की ऐसी हालत देखकर बहुत दुखी हो गया। उसने गुस्से से मोंटू से कहा – “मैं तुम्हें अभी नीचे फेंक दूँगा”।

पर मोंटू भी कम नहीं था। वह तुरंत लंबू की पीठ पर चढ़ बैठा। चाँद की तकलीफ़ देखकर सितारों को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने लंबू के ऊपर छोटा आकार करने वाली चमकीली किरणें बिखेर दी। लंबू तुरंत छोटा होने लगा और कुछ ही पलों बाद नीचे आ गया। उसके साथ ही मोंटू भी जंगल में आ गया। लंबू जब तक उससे कुछ कहता तब तक मोंटू हँसता हुआ भाग गया। लंबू चाँद के लिए बहुत दुखी था। वह कई दिन तक पेड़ के पास जाकर चाँद को पुकारता रहा, बुलाता रहा। वह कई बार रोते हुए कहता – “चाँद, मेरे दोस्त मुझे तुम्हारी याद आ रही है”।

पर चाँद ने उसे नहीं बुलाया। लंबू सोचता था कि चाँद उससे भी नाराज़ हो गया पर वह नहीं जानता था कि चाँद उसे बहुत प्यार करता था और उसे अपने पास बुलाना चाहता था, पर सितारों ने चाँद को ऐसा नहीं करने दिया। उन्हें डर था कि मोंटू कहीं फ़िर से आकर उन सबको कोई नुकसान ना पहुँचा दे। लंबू की याद में चाँद हमेशा आता रहा और ठीक होने के बाद भी कभी तो वह पूरा गोल चमचमाता हुआ दिखता और कभी अपने आप को बादलों के बीच थोड़ा सा ऐसे ढक लेता कि वह आधा ही दिखे। वह चाहता था कि लंबू को याद आ जाए कि अगर वह उसे ऊपर बुलाएगा तो मोंटू भी उसके आसमान में आ जाएगा। चाँद और लंबू की दोस्ती अभी भी है। लंबू पेड़ के पास जाकर चाँद को को निहारता है और चाँद हमेशा लंबू को देख कर अपनी दोस्ती याद करता है।

~ डॉ. मंजरी शुक्ला [बाल भारती के जुलाई 2018 अंक में छपी यह कहानी]

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