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गब्बू का हैप्पी न्यू ईयर: नव वर्ष के उपलक्ष में हिंदी कहानी

गब्बू का हैप्पी न्यू ईयर: नव वर्ष के उपलक्ष में हिंदी कहानी

गब्बू भालू बेच तो गुब्बारे रहा था पर उसका पूरा ध्यान, पेड़ पर लगे शहद के छत्ते पर था।

मधुमक्खियाँ भी कम शैतान नहीं थी। वे भी अपने छत्ते में आराम से बैठकर गब्बू को देख रही थी और हँस रही थी।

उन्होंने टॉमी कुत्ते को थोड़ा सा शहद देकर अपनी तरफ़ मिला लिया था।

टॉमी को शहद इतना पसँद था कि उसने छत्ते की देखरेख करने के चक्कर में पेड़ के पास से हिलना डुलना ही बंद कर दिया था।

गब्बू ने जब समझ लिया कि वह शहद नहीं खा सकेगा तो उसने छत्ते को देखकर बुरा सा मुँह बनाया और अपने गुब्बारों को देखने लगा।

तभी व्हाइटी खरगोश आया और बोला – “मुझे बीस गुब्बारे दे दो”।

“इतने सारे गुब्बारों का तुम क्या करोगे” गब्बू ने आश्चर्य से पूछा।

“अरे, कल नया साल है ना, तो मैं अपना घर रंगबिरंगे गुब्बारों से सजाऊँगा और अपना मनपसंद गाजर का हलवा भी खाऊँगा” व्हाइटी खुश होता हुआ बोला।

गब्बू हँस दिया और बोला – “मन तो मेरा भी बहुत है शहद खाने का, पर वो कालू मुझे छत्ता तोड़ने ही नहीं देगा”।

व्हाइटी ने गुस्सा होते हुए कहा – “मधुमक्खियाँ दिन रात मेहनत करके शहद तैयार करती है और तुम उनका छत्ता तोडना चाहते हो”।

गब्बू सकपका गया। वह अपनी सफाई में कुछ कहने ही जा रहा था कि व्हाइटी बोला – “और मुझे देखो मैं खुद ज़मीन के अंदर से गाजर खोदकर निकालता हूँ, तब खाता हूँ।”

“पर मेरे दाँत तुम्हारे दाँतों की तरह तरह इतने बड़े नहीं है ना” गब्बू ने व्हाइटी के चार बड़े दाँतों को गौर से देखते हुए कहा।

व्हाइटी ने गब्बू को गुस्से से देखा और अपने दाँतों पर हाथ फेरा।

गब्बू सकपकाता हुआ बोला – “मेरा मतलब था कि अगर मेरे भी ऐसे बड़े-बड़े दाँत होते तो मैं भी गाजर खोदने में तुम्हारी मदद करता”।

गब्बू का हैप्पी न्यू ईयर: मंजरी शुक्ला हिंदी कहानी

व्हाइटी ये सुनकर हँसने लगा और बोला – “अब जल्दी से मुझे गुब्बारे दो”।

गब्बू गुब्बारे गिनने लगा पर वह ये समझ गया था कि उसे मधुमक्खियों का छत्ता नहीं तोड़ना चाहिए।

उसने पेड़ की तरफ़ देखा तो वहाँ पर कालू नहीं था।

गब्बू बुदबुदाया – “छत्ता नहीं तोड़ने की बात भी मुझे तब समझ में आई है जब मैं आराम से पेड़ पर चढ़कर शहद खा सकता हूँ”।

तभी व्हाइटी बोला – “इतने सारे गुब्बारे फुलाएगा कौन, तुम मुझे ये हवा वाले गुब्बारे दे दो”।

गब्बू कुछ समझता, इससे पहले ही व्हाइटी ने गब्बू के हाथों से गुब्बारों की डोरी छीन ली।

डोरी हाथ में पकड़ते ही व्हाइटी हवा में उड़ चला।

गब्बू चिल्लाया – “मना किया था ना इतने सारे हवा वाले गुब्बारों को पकड़ने को”!

पर व्हाइटी तो ख़ुशी से चीख रहा था।

वह बोला – “मेरी बचपन से इच्छा थी कि मैं एक बार हवा में ज़रूर उड़ूँ”।

थोड़ी देर तक तो गुब्बारे हवा के साथ साथ उड़ते रहे पर अचानक ही पीले गुब्बारे की लम्बी डोरी पेड़ की एक टहनी में फँस गई।

अब गुब्बारों के साथ साथ व्हाइटी भी पेड़ पर अटक गया।

गब्बू ने देखा कि पेड़ कि सबसे ऊँची डाल पर व्हाइटी उल्टा लटका हुआ था।

गब्बू उसे बचाने के लिए पेड़ की ओर चल पड़ा।

उधर छत्ते पर बैठी मधुमक्खियों ने सोचा कि गब्बू शहद खाने के लिए आ रहा है।

कालू भी कहीं नज़र नहीं आ रहा था इसलिए सभी मधुमक्खियों ने खुद को बचाने के लिए गब्बू पर हमला बोल दिया।

बेचारा गब्बू इशारा करके पेड़ पर टंगे व्हाइटी को दिखाता रहा पर किसी का भी ध्यान उस ओर नहीं गया।

गब्बू के चेहरे पर डंक लगने से उसे बहुत दर्द हो रहा था।

उसकी आँखों में आँसूं आ गए और वह बोला – “मेरी बात तो सुनो”।

पर किसी ने गब्बू की बात नहीं सुनी। सब उसे जोर जोर से काट रही थी।

वह पेड़ पर दर्द से सूजी हुई आँखें लिए हुए चढ़ता ही रहा।

जब वह छत्ते के पास पहुँचा तो मधुमक्खियों ने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर ली।

पर गब्बू ने तो छत्ते की तरफ़ देखा तक नहीं और वह और ऊपर चल पड़ा।

अब जाकर सबने देखा कि सबसे ऊपर की डाली पर व्हाइटी डोरी में उलझकर उल्टा लटका हुआ था।

गब्बू ने जाकर व्हाइटी को पकड़कर सीधा किया और उसके पैरों में उलझी हुई डोरी खोल दी।

व्हाइटी ख़ुशी के मारे गब्बू के गले लग गया।

गब्बू मुस्कुराया और धीरे धीरे वापस नीचे आ गया।

गब्बू के चेहरे को देखकर व्हाइटी रोने लगा।

मधुमक्खियों को भी अब बहुत दुःख हो रहा था।

तभी उनकी रानी बोली – “हमें गब्बू की बात तो सुन लेनी चाहिए थी। पूरी बात सुने बिना ही हमने उसे काट लिया”।

“हाँ…  वह चाहता तो एक ही बार में हमारा छत्ता तोड़ लेता पर उसने ऐसा नहीं किया” दूसरी मधुमक्खी ने गब्बू को देखते हुए कहा।

कालू भी गब्बू का सूजा हुआ चेहरा देखकर बहुत दुखी था।

गब्बू को बहुत जोर से रोना आ रहा था इसलिए वह चुपचाप अपने घर की ओर चल दिया।

दर्द के मारे रात भर गब्बू की आँखों में रह रहकर आँसूं आ जाते।

अगले दिन सुबह गब्बू ने जब अपना दरवाज़ा खोला तो व्हाइटी एक बड़ा सा डिब्बा लिए खड़ा था।

गब्बू ने मुस्कुराते हुए बोला – “हैप्पी न्यू ईयर”।

“ये केक मैंने स्पेशल तुम्हारे लिए बनाया है” व्हाइटी गब्बू का हाथ पकड़ते हुए बोला।

गब्बू को गाजर का केक बिलकुल पसँद नहीं था पर व्हाइटी इतने प्यार से उसके लिए केक लाया था इसलिए वह डिब्बा खोलने लगा।

डिब्बा खुलते ही गब्बू को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ।

उसका मनपसंद “हनी केक” उसकी आँखों के सामने था। शहद की खुशबू कमरे में चारों ओर फ़ैल गई थी।

ख़ुशी के मारे गब्बू एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा था।

तभी सभी मधुमक्खियाँ कमरे के अंदर आई और बोली – “हैप्पी न्यू ईयर गब्बू”।

आँसुओं को रोकते हुए गब्बू भरे गले से बोला – “सेम तो यू”।

सबने मिलकर गब्बू के मुँह में “हनी केक” डाल दिया।

आँखें बंद किये हुए गब्बू केक खा रहा था और सोच रहा था, “दोस्ती सच में बहुत मीठी होती है”।

मंजरी शुक्ला [गब्बू का हैप्पी न्यू ईयर: यह हिंदी कहानी नंदन में भी प्रकाशित हुई है]

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