चिंटू की डिजिटल घड़ी: रोचक हिंदी हास्य बाल कहानी

चिंटू की डिजिटल घड़ी: रोचक हिंदी हास्य बाल कहानी

मम्मी ने आवाज़ लगाई – “मामा तुमसे बात करना चाहते है”।

चिंटू ने सुन लिया और चुपचाप बना पड़ा रहा।

मम्मी बोली – “जल्दी उठो”।

“सोने दो ना” चिंटू बुदबुदाया।

चिंटू की डिजिटल घड़ी: डॉ. मंजरी शुक्ला

“अरे, तुम इतने दिनों से घड़ी के पीछे पड़े थे ना तो मामा उसी के बारे में बात करना चाहते है”।

“ओह! कहीं फ़ोन कट तो नहीं गया” कहते हुए चिंटू ने मम्मी के हाथ से मोबाइल ले लिया।

मामा की बात सुनते ही चिंटू हँसते हुए कूदने लगा।

मम्मी मुस्कुराते हुए बोली – “क्या लॉटरी लग गई”?

“हाँ, मामा ने लगाई। उन्होंने मेरे लिए स्पेशल घड़ी भेजी है जिसमें बातें भी रिकॉर्ड होती है और वह घड़ी आज, यानी मेरे दसवें बर्थडे पर आ रही है”।

तभी चिंटू बोला – “आज मेरा बर्थडे भले ही नहीं मन रहा है पर जब पापा टूर से लौट आए तो आप बहुत बड़ा केक लाना और पार्टी भी करना”।

“उस केक पर हम “छोटा भीम” भी बनवाएँगे”।

चिंटू ख़ुशी से उछल पड़ा और कमरे से भाग गया।

जब मम्मी चिंटू का कमरा साफ़ करके बाहर आई तो उन्होंने चिंटू को दरवाज़े के बगल में बैठा पाया।

चिंटू तुरंत बोला – “मैंने नहा लिया”।

“पर तुम स्टूल रखकर क्यों बैठे हो”?

“कूरियर आने वाला है ना”!

मम्मी हँस दी और चिंटू का मनपसंद मटर पनीर बनाने चली गई।

थोड़ी देर बाद किसी के सीढ़ियाँ चढ़ने की आवाज़ आई।

चिंटू ने तुरंत दरवाज़ा खोल दिया।

कूरियर वाला हैरत से बोला – “मैंने घंटी तो बजाई ही नहीं”!

“जादू” कहते हुए चिंटू ने डिब्बा लिया।

वह भागते हुए सीधे अपने कमरे में जा पहुँचा और फटाफट डिब्बा खोलने लगा।

वह डिब्बा खोलते ही वह ख़ुशी से चिल्लाया – “मेरी नई डिजिटल घड़ी“!

मम्मी ने देखा कि चिंटू काले रंग की खूबसूरत घड़ी पकड़े बैठा हुआ था।

“ये तो बहुत सुन्दर है” मम्मी ने घड़ी को छूते हुए कहा।

“हाँ, इसमें ब्लूटूथ भी है और इससे आपको अपनी हैल्थ से जुड़ी जानकारियाँ भी मिलेगी और…

“बस… बस” कहते हुए मम्मी हँस दी।

चिंटू तुरंत मोबाइल की ओर दौड़ा और कुछ ही देर बाद उसके दो दोस्त, मनु और शिबू घड़ी को बारी बारी से पहन कर देख रहे थे।

चिंटू बोला – “मेरे बर्थडे की पार्टी के लिए “हैप्पी बर्थडे” का गाना रिकॉर्ड कर लेते है”।

“हाँ… सबसे पहले हम अपना गाया हुआ गाना बजाएँगे” मनु खुश होते हुए बोला।

चिंटू ने जल्दी से घड़ी में रिकॉर्डिंग ऑन की और दौड़कर अपना सिंथेसाइज़र ले आया।

सब मिलकर “हैप्पी बर्थडे” गाने लगे।

गाना खत्म होने पर शिबू ने घड़ी उठाते हुए कहा – “लाओ, इसकी रिकॉर्डिंग बंद कर दूँ”।

“हाँ, बंद करके सामने मेज पर रख दो” चिंटू बोला।

“बड़ा मज़ा आएगा, जब केक कटेगा” शिबू ने कहा।

“हाँ, और साथ में हमारा गाना भी बजेगा” मनु तुरंत बोला।

तीनों हँस पड़े और पार्टी में बुलाने वाले दोस्तों के नाम लिखने लगे।

तभी मम्मी आकर बोली – “प्रिंसिपल सर के साथ साथ बाकी टीचर्स के भी नाम लिख लेना। वे सब हमारी कॉलोनी में ही रहते है”।

“हाँ, मम्मी” कहते हुए चिंटू नाम लिखने लगा।

जब सारी लिस्ट पूरी हो गई तो मनु बोला – “अब हम लोग चलते है”।

“हाँ, मैं कल ही स्कूल में पार्टी की डेट बता दूँगा”।

“सबसे ज़्यादा केक हम दोनों खाएँगे” कहते हुए मनु हँसते हुए शिबू के साथ चला गया।

पापा ने रात में ही अपने लौटने की बात के साथ साथ पार्टी की तारीख़ भी बता दी।

चिंटू को पता चलने की देर थी कि उसने अपने सभी दोस्तों के साथ साथ प्रिंसिपल सर और अपने टीचर्स को भी आमंत्रित कर लिया।

पाँच दिन के बाद आख़िर आज शाम को चिंटू की बर्थडे पार्टी मन रही थी। सभी दोस्त और बाकी मेहमान आपस में खूब हँसी मज़ाक करते हुए स्नेक्स खा रहे थे।

तभी पापा बोले – “अब केक टाइम”।

बच्चों के साथ साथ बड़ों के चेहरों पर भी मुस्कान तैर गई।

सब केक की मेज़ के चारों तरफ़ आकर इकठ्ठा हो गए।

जैसे ही चिंटू ने चाकू पकड़ा, मनु बोला – “पहले हमारा वाला “हैप्पी बर्थडे” वाला गाना”।

“मैंने मनु और शिबू के साथ मिलकर गाना रिकॉर्ड किया था क्या उसे पहले बजा लूँ” चिंटू ने पापा से पूछा।

“आज तुम्हारी हर बात मानी जायेगी” प्रिंसिपल सर हँसते हुए बोले।

चिंटू ने घड़ी में एक बटन दबाया और “हैप्पी बर्थडे” की मधुर धुन पूरे कमरे में गूँज उठी।

जैसे ही गाना खत्म हुआ सब ताली बजाने लगे।

तभी चिंटू की आवाज़ गूंजी – “जब प्रिंसिपल सर आएँगे ना तो उन्हें ध्यान से देखना। उन्हें देख लो और भालू को देख लो, कोई अंतर नहीं”।

सभी मेहमान तुरंत बड़े ही ध्यान से प्रिंसिपल सर की तरफ़ देखने लगे।

पापा ने चिंटू की तरफ़ देखा।

चिंटू के चेहरे पर डर के मारे हवाइयाँ उड़ रही थी।

“और शर्मा मैडम तो ऐसे चिल्लाती है जैसे दहाड़ रही हो। मुझे तो रात में बब्बर शेर के सपने आते है” घड़ी से शिबू की आवाज़ गूंजी।

ये सुनते ही तीनों दोस्तों के हँसने की आवाज़ बहुत देर तक आती रही।

प्रिंसिपल सर बोले – “मैं एक बात कहना चाहता हूँ”।

घबराहट के मारे चिंटू की आँखें भर आई।

प्रिंसिपल सर मुस्कुराते हुए बोले – “मेरी मम्मी आज भी मुझे “टेडी बियर” कहकर ही बुलाती है”।

सभी ने एक दूसरे की तरफ़ देखा और कमरे में हँसी का फव्वारा फूट पड़ा।

प्रिंसिपल सर के साथ साथ मिश्रा सर और शर्मा मैडम भी जोर-जोर से हँस रहे थे।

और चिंटू की आँखें ढूँढ रही थी शिबू को, पर शिबू… वो भला किसी को कैसे नज़र आता। वह तो डर के मारे केक की मेज के नीचे छुपा हुआ बैठा था।

~ “चिंटू की डिजिटल घड़ी” by डॉ. मंजरी शुक्ला

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