कोणार्क सूर्य मंदिर, उड़ीसा

कोणार्क सूर्य मंदिर, उड़ीसा

उड़ीसा प्रांत में स्थित कोणार्क भारत की विश्व प्रसिद्ध धरोहर है। UNESCO ने भी ऐतिहासिक पुरातन धरोहरों में इसे सम्मिलित कर रखा है। अपनी शिल्पकला, स्थापत्य कला, मूर्तकला, अद्भुत नक्काशी तथा सजीव मैथुन दृश्यों के लिए प्रसिद्ध कोणार्क में सूर्य मंदिर का अस्तित्व है। वैसे तो सूर्य भगवान शक्तिशाली देवताओं में शुमार होते हैं मगर कुष्ठ रोग के निवारण के लिए तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए अनादिकाल से सूर्य उपासना एक महत्वपूर्ण कर्म रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग हो गया था। कुष्ठ रोग निवारण के लिए तब भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं साम्ब को सूर्य उपासना का निर्देश दिया था।

ऐसा माना जाता है कि तब साम्ब ने सूर्य भगवान की मूर्ति स्थापित की थी जो आज जगन्नाथपुरी में सुरक्षित है। इसी प्रकार से राजा लांगुला नृसिंह देव को भी कुष्ठ रोग हो गया था जिसके निवारण के लिए धर्मवेत्ताओं ने उन्हें सूर्य मंदिर की स्थापना करके कुष्ठ निवारण का उपाय बताया था। धर्मवेत्ताओं की सलाह पर राजा ने उड़ीसा के एकांत सागर तट पर भगवान सूर्य का ऐसा भव्य मंदिर बनाया वैसा आज तक कोई नहीं बना। कोणार्क जगन्नाथपुरी व भुवनेश्वर से ज्यादा दूरी पर नहीं है। केवल कुछ समय में ही उसका सफर तय किया जा सकता है।

एक तो समुद्री किनारा, दूसरा चंद्रभागा नदी का निकट होना कोणार्क के सूर्य मंदिर के लिए वरदान सिद्ध हुआ। प्राचीन समय में माघ शुक्ला सप्तमी के दिन चंद्रभागा नदी में स्नान करना पुण्यदायी माना जाता था। मान्यता आज भी कायम है। इन्हीं कारणों सहित अन्य कई कारणों से कोणार्क का सूर्य मंदिर एक समय में सौर सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण केंद्र हो गया था। 13वीं शताब्दी में काले ग्रेनाइट पत्थरों से बने कोणार्क के सूर्य मंदिर को ‘ब्लैक पैगोडा’ भी कहा जाता है। रबिन्द्रनाथ टैगोर ने इस मंदिर के विषय में यह कहा था कि कोणार्क का सूर्य मंदिर वह स्थान है जहां पत्थरों की भाषा, मनुष्यों की भाषा से बढ़कर है।

कोणार्क मंदिर में कोई मूर्त नहीं है, यह इस मंदिर की अनूठी विशेषता है। यह मंदिर चारों ओर से पक्के घेरे के भीतर है जो सरोवर की तरह जान पड़ता है। वस्तुत: यह विशाल रथ मंदिर है जिसमें रथ पर आरूढ़ सूर्य भगवान की कल्पना की गई है। यह मंदिर 1200 शिल्पियों की कड़ी मेहनत से 12 साल में लाखों रुपयों के खर्चे के बाद निर्मित हुआ। कोणार्क मंदिर में 3 आकार के सूर्य देवता है जो चारों ओर की बाहरी दीवारों पर अवस्थित हैं।

Check Also

Sutradhar: Ratul Chakraborty - A collection of stories

Sutradhar: Ratul Chakraborty’s Book Review

Book Name: Sutradhar Author: Ratul Chakraborty Publisher: Pages: 280 pages Price: $ 16.99 Sutradhar is …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *