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अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार

अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार विद्यार्थियों और बच्चों के लिए

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पहले प्रधानमन्त्री और रिकॉर्ड 9 बार लोकसभा के लिए चुने गये अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर, ब्रिटिश भारत में हुआ। इनके पिता का नाम पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी था जो मध्य प्रदेश की रियासत ग्वालियर में अध्यापक थे और हिन्दी और ब्रज भाषा के कवि भी थे। इनकी माता का नाम कृष्णा वाजपेयी था। अटल बिहारी वाजपेयी पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने प्रधानमंत्री पद का कार्यकाल 5 वर्ष तक बिना किसी समस्या के पूरा किया। भारतीय जनसंघ की स्थापना में इनकी प्रमुख भूमिका थी। अपनी छोटी उम्र में ही वाजपेयी जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहे। इन्होने वीर अर्जुन, राष्ट्रधर्म और दैनिक स्वदेश आदि पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कार्य भी किया।

सरकार द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी को सन 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार विद्यार्थियों और बच्चों के लिए

  • आज वैश्विक निर्भरता का अर्थ यह है कि विकासशील देशों में आई आर्थिक आपदाएं विकसित देशों में संकट ला सकती हैं।
  • शीत युद्ध के बाद आये उत्साह में एक गलत धारणा बन गयी की संयुक्त राष्ट्र कहीं भी कोई भी समस्या हल कर सकता है।
  • किसी भी मुल्क को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझदारी का हिस्सा होने का ढोंग नहीं करना चाहिए, जबकि वो आतंकवाद को बढाने, उकसाने और प्रायोजित करने में लगा हुआ हो।
  • हमारे परमाणु हथियार विशुद्ध रूप से किसी विरोधी के परमाणु हमले को हतोत्साहित करने के लिए हैं।
  • जो लोग हमसे पूछते हैं कि हम कब पाकिस्तान से वार्ता करेंगे वो शायद ये नहीं जानते कि पिछले 55 सालों में पाकिस्तान से बातचीत करने के सभी प्रयत्न भारत की तरफ से ही आये हैं।
  • गरीबी बहुआयामी है। यह हमारी कमाई के अलावा स्वास्थय, राजनीतिक भागीदारी और हमारी संस्कृति और सामाजिक संगठन की उन्नति पर भी असर डालती है।
  • जैव – विविधता कन्वेंशन ने विश्व के गरीबों को कोई ठोस लाभ नहीं पहुँचाया है।
  • भारत में भारी जन भावना थी कि पाकिस्तान के साथ तब तक कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती जब तक कि वो आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेशी नीति के एक साधन के रूप में करना नहीं छोड़ देता।
  • वास्तविकता ये है कि यू एन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन उतने ही कारगर हो सकते हैं जितना की उनके सदस्य उन्हें होने की अनुमति दें।
  • संयुक्त राष्ट्र की अद्वितीय वैधता इस सार्वभौमिक धारणा में निहित है कि वह किसी विशेष देश या देशों के समूह के हितों की तुलना में एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करता है।
  • पहले एक अन्तर्निहित दृढ विश्वास था कि संयुक्त राष्ट्र अपने घटक राज्यों की कुल शक्ति की तुलना में अधिक शक्तिशाली होगा।
  • हम मानते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका और बाकी अंतर्राष्ट्रीय समुदाये पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को हमेशा के लिए ख़तम करने का दबाव बना सकते हैं।
  • हम उम्मीद करते हैं की विश्व प्रबुद्ध स्वार्थ की भावना से काम करेगा।
  • आप मित्र बदल सकते हैं पर पडोसी नहीं।

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