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Maharana Pratap Jayanti

वीर सिपाही: श्याम नारायण पाण्डेय की वीर रस कविता

Here is another excerpt from “Haldighaati” the great Veer-Ras Maha-kavya penned by Shyam Narayan Pandey. Here is a description of a soldier fighting for the Motherland.

वीर सिपाही: वीर रस कविता

भारत-जननी का मान किया,
बलिवेदी पर बलिदान किया
अपना पूरा अरमान किया,
अपने को भी कुर्बान किया

रक्खी गर्दन तलवारों पर
थे कूद पड़े अंगारों पर,
उर ताने शर-बौछारों पर
धाये बरछी की धारों पर

झनझन करते हथियारों में
अरि-नागों की फुफकारों में
जंगीगंज-प्रबल कतारों में
घुस गये स्वर्ग के द्वारों में

उनमें कुछ ऐसी आन रही,
कुछ पुश्तैनी यह बान रही
मेवाड़-देश के लिए सदा
वीरों की सस्ती जान रही

कहते थे भला आने दो
चिल्ले पर तीर चढाने दो
आग को पैर बढ़ाने दो
रन में घोड़ा दौड़ाने दो

देखो फिर कुंतल बालों की,
कुछ करामात करवालों की
इस वीर-प्रसवनी अवनी के
छोटे से छोटे बालों की

बसने तक को है ग्राम नहीं,
जंगल में रहते धाम नहीं
पर भीषण यही प्रतिज्ञा है,
अरि कर सकते आराम नहीं

हम माता के गन गायेंगे
बलि जन्म-भूमि पर जायेंगे
अपना झंडा फहराएंगे
हम हाहाकार मचायेंगे

श्याम नारायण पाण्डेय

श्याम नारायण पांडेय वीर रस के अद्भुत कवियों में से एक थे। वे काशी के प्रसिद्ध साहित्याचार्य थे। उन्होंने चार महाकाव्य रचे, जिनमें ‘हल्दीघाटी’ और ‘जौहर’ विशेष चर्चित हुए। ‘हल्दीघाटी’ में महाराणा प्रताप के जीवन और ‘जौहर’ में रानी पद्मिनी के आख्यान हैं। ‘हल्दीघाटी’ पर श्याम नारायण पांडेय को ‘देव पुरस्कार’ प्राप्त हुआ था। अपनी ओजस्वी वाणी के कारण श्याम नारायण पांडेय कवि सम्मेलनों में बड़े लोकप्रिय थे।

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