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Suryakant Tripathi 'Nirala' Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनि

Suryakant Tripathi ‘Nirala’ Saraswati Vandana in Hindi वर दे वीणावादिनी

Here is an old classic by the famous poet Suryakant Tripathi Nirala. This lovely composition in chaste Hindi is a pleasure to sing loudly for its sheer rhythm and zing. On this Independence Day, this national poem should be shared by all.

वर दे वीणावादिनी! वर दे।
प्रिय स्वतंत्र–रव अमृत–मंत्र नव,
भारत में भर दे।

काट अंध–उर के बंधन–स्तर,
बहा जननि ज्योतिर्मय निर्झर,
कलुष–भेद–तम हर, प्रकाश भर,
जगमग जग कर दे।

नव गति, नव लय, ताल छंद नव,
नवल कंठ, नव जलद मंद्र–रव,
नव नभ के नव विहग–वृंद को,
नव पर नव स्वर दे।

वर दे वीणावादिनी! वर दे।

~ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला हिन्दी के छायावादी कवियों में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। निराला जी एक कवि, उपन्यासकार, निबन्धकार और कहानीकार थे। उन्होंने कई रेखाचित्र भी बनाये। उनका व्यक्तित्व अतिशय विद्रोही और क्रान्तिकारी तत्त्वों से निर्मित हुआ है। उसके कारण वे एक ओर जहाँ अनेक क्रान्तिकारी परिवर्तनों के स्रष्टा हुए, वहाँ दूसरी ओर परम्पराभ्यासी हिन्दी काव्य प्रेमियों द्वारा अरसे तक सबसे अधिक ग़लत भी समझे गये। उनके विविध प्रयोगों – छन्द, भाषा, शैली, भावसम्बन्धी नव्यतर दृष्टियों ने नवीन काव्य को दिशा देने में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इसलिए घिसी-पिटी परम्पराओं को छोड़कर नवीन शैली के विधायक कवि का पुरातनतापोषक पीढ़ी द्वारा स्वागत का न होना स्वाभाविक था। लेकिन प्रतिभा का प्रकाश उपेक्षा और अज्ञान के कुहासे से बहुत देर तक आच्छन्न नहीं रह सकता।

आपको “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला” जी की यह कविता “वर दे वीणावादिनी” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

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2 comments

  1. Abhinandan Kumar Pandey

    अनुपम कविता महाप्राण निराला जी की कलम से

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