Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी – वंदना गोयल
टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी - वंदना गोयल

टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी – वंदना गोयल

इस टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी को
हंस के मैं पी रही हूं

किस्तों में मिल रही है
किस्तों में जी रही हूं

कभी आंखों में छिपा रह गया था
इक टुकड़ा बादल

बरसते उन अश्कों को
दिनरात मैं पी रही हूं

अक्स टूटते बिखरते
आईनों से बाहर निकल आते हैं

मेरा समय ही अच्छा नहीं
बस जज्बातों में जी रही हूं

अश्कों के धागे से जोड़ने
बैठी हूं टूटा हुआ दिल

मैं पलपल कतराकतरा
मोम बन पिघल रही हूं

झांझर की तरह पांव में भंवर
हालात ने बांधे हैं

रुनझुन संगीत की तरह
मैं खनक रही हूं

मौत, हसीं दोस्त की तरह
दरवाजे तक भी नहीं आती

मैं घडि़यां जिंदगी की
इक इक सांस पे गिन रही हूं

किस्तों में मिल रही है
किस्तों में जी रही हूं

टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी को
हंस के मैं पी रही हूं।

~  वंदना गोयल

आपको यह कविता कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Papmochani Ekadashi

Papmochani Ekadashi Vrat, Date, Katha

Papmochani Ekadashi falls on the 11th day of fading phase of moon in Chaitra month …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *