तू तुम आप - ओमप्रकाश बजाज - Bal Kavita on Good Manners & Etiquettes

तू तुम आप – Bal Kavita on Good Manners & Etiquette

तू करके किसी को न बोलो,
किसी को तुम भी कभी न बोलो।

अच्छा संबोधन सब को भाता है,
सुनकर मन प्रसन्न हो जाता है।

आत्मसम्मान सभी का होता है,
इनमें छोटा-बड़ा नहीं होता है।

तू तुम की बजाय आप बोलना,
आप के अच्छे संस्कार दर्शाता है।

अच्छे लालन-पालन अच्छी दीक्षा का,
आपके मुहं खोलते पता चल जाता है।

अपने से छोटों, अपने निकट वालों को,
हमेशा आप ही कह कर बुलाना।

तू और तुम से बुलाने की अपनी,
आदत से छुटकारा पाना।

~ ओमप्रकाश बजाज

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