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शत् शत् नमन: उर्मिलेश की देश भक्ति कविता

शत् शत् नमन: उर्मिलेश की देश भक्ति कविता

भारत की आजादी की लड़ाई में यूं तो लाखों-करोड़ों हिंदुस्तानियों ने भाग लिया लेकिन कुछ ऐसे सपूत भी थे जो इस आजादी की लड़ाई के प्रतीक बनकर उभरे। राष्ट्रधर्म की खातिर क्रांति की पहली गोली चलाने वाले को भले ही तोपों से उड़ा दिया गया लेकिन जो चिंगारी उन्होंने लगाई उस आग में तपकर निकले स्वाधीनता सेनानियों ने अपने अहिंसक आंदोलन से अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।  आजादी की महागाथा में उन युवा महानायकों को भी याद रखा जाएगा जिन्होंने बहरे कानों को सुनाने के लिए धमाके किए तो किसी ने देश के लिए ‘आजाद’ शहीद होना चुना। खून के बदले आजादी के नारों के साथ सेना का गठन कर शक्तिशाली बरतानवी साम्राज्य को चुनौती देने का साहस करने वाले वीरों और भारत को खंडित होने से बचाने वाले फौलादी इरादों से ही इस स्वतंत्र भारत की नींव पड़ी है…

A lovely poem of patriotism. Expression of pride for the soldier who gives his life for the nation.

उर्मिलेश जी की देश प्रेम कविता बच्चों के लिए

मिटाकर शत्रु को जो मिट गये खुद आन की खातिर
उन्हें शत्-शत् नमन मेरा, उन्हें शत्-शत् नमन मेरा!

जिन्होंने बर्फ में भी शौर्य की चिंगारियां बो दीं,
पहाड़ी चोटियों पर भी अभय की क्यारियां बो दीं
भगाकर दूर सारे गीदड़ों, सारे श्रृगालों को
जिन्होंने सिंह वाले युद्ध में खुद्दारियां बो दीं।

अहर्निश जो बढ़े आगे विजय-अभियान की खातिर
उन्हें शत्-शत् नमन मेरा, उन्हें शत्-शत् नमन मेरा!

शुरू से आज तक इतिहास यह देता गवाही है
हमारी वीरता मृत्युंजयी है, शौर्य-ब्याही है
अलग से वह न पत्थर है, न लोहा है, न शोला है,
सभी का सम्मिलित प्रारूप, भारत का सिपाही है!

लुटाते प्राण तक जो देश की अभिमान के खातिर,
उन्हें शत्-शत् नमन मेरा, उन्हें शत्-शत् नमन मेरा!

शहीदों की चिताएँ तो वतन की आरती सी हैं
उठीं लपटें किसी नागिन-सदृश फुफकारती–सी हैं
चिताओं की बुझी हर राख गंगा-रेणु सी लगती
निहत्थी अस्थियाँ भी शस्त्र की छवि धारती-सी हैं

जिन्होंने दे दिया बलिदान हिंदुस्तान की खातिर,
उन्हें शत्-शत् नमन मेरा, उन्हें शत्-शत् नमन मेरा!

~ उर्मिलेश

सैकड़ों वर्षों से ग़ुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ भारत सन 1947 में आज़ाद हुआ। यह आजादी लाखों लोगों के त्याग और बलिदान के कारण संभव हो पाई। इन महान लोगों ने अपना तन-मन-धन त्यागकर देश की आज़ादी के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।

अपने परिवार, घर-बार और दुःख-सुख को भूल, देश के कई महान सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी ताकि आने वाली पीढ़ी स्वतंत्र भारत में चैन की सांस ले सके। स्वतंत्रता आन्दोलन में समाज के हर तबके और देश के हर भाग के लोगों ने हिस्सा लिया।

स्वतंत्र भारत का हरेक व्यक्ति आज इन वीरों और महापुरुषों का ऋणी है जिन्होंने अपना सब कुछ छोड़ सम्पूर्ण जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया। भारत माता के ये महान सपूत आज हम सब के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। इनकी जीवन गाथा हम सभी को इनके संघर्षों की बार-बार याद दिलाती है और प्रेरणा देती है। अपने ‘स्वतंत्रता सेनानी’ भाग में हम इन तमाम महापुरुषों और महिलाओं के जीवन के बारे में जानेंगे जिन्होंने ने कठोर और दमनकारी ‘अंग्रेजी हुकूमत’ से लड़कर देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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