Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » सद्य स्नाता – प्रतिभा सक्सेना
सद्य स्नाता - प्रतिभा सक्सेना

सद्य स्नाता – प्रतिभा सक्सेना

झकोर–झकोर धोती रही,
संवराई संध्या,
पश्चिमी घात के लहराते जल में,
अपने गौरिक वसन,
फैला दिये क्षितिज की अरगनी पर
और उत्तर गई गहरे
ताल के जल में

डूब–डूब, मल–मल नहायेगी रात भर
बड़े भोर निकलेगी जल से,
उजले–निखरे सिन्ग्ध तन से झरते
जल–सीकर घांसो पर बिखेरती,
ताने लगती पंछियों की छेड़ से लजाती,
दोनो बाहें तन पर लपेट
सद्य – स्नात सौंदर्य समेट,
पूरब की अरगनी से उतार उजले वस्त्र
हो जाएगी झट
क्षितिज की ओट!

~ प्रतिभा सक्सेना

शब्दार्थ:
सद्य स्नाता ∼ अभी अभी नहाकर निकली लड़की
गौरिक वसन ∼ गेरुए वस्त्र

Check Also

Bollywood 2018 Horror Comedy Film: Nanu Ki Jaanu Movie Review

Bollywood 2018 Horror Comedy Film: Nanu Ki Jaanu Movie Review

Directed by: Faraz Haider Starring: Abhay Deol, Patralekha, Manu Rishi Release date: 20 April 2018 …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *