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सच झूठ - ओमप्रकाश बजाज

सच झूठ – ओमप्रकाश बजाज

सच झूठ का फर्क पहचानो
झूठे का कहा कभी न मानो।

झूठे की संगत न करना,
झूठे से सदा बचकर रहना।

मित्रता झूठे से न करना,
झूठे का कभी साथ न देना।

झूठ कभी भी चुप न पाता,
देर-सवेर पकड़ा ही जाता।

सच्चे का होता सदा बोलबाला,
झूठे का मुँह होता काला।

~ ओमप्रकाश बजाज

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