Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » ऋतुओं की ऋतू बसंत – सुमित्रानंदन पंत

ऋतुओं की ऋतू बसंत – सुमित्रानंदन पंत

Rituo Ki Ritu Basant - HIndi Poemफिर वसंत की आत्मा आई,
मिटे प्रतीक्षा के दुर्वह क्षण,
अभिवादन करता भू का मन।

दीप्त दिशाओं के वातायन,
प्रीति सांस-सा मलय समीरण,
चंचल नील, नवल भू यौवन,
फिर वसंत की आत्मा आई,
आम्र मौर में गूंथ स्वर्ण कण,
किंशुक को कर ज्वाल वसन तन।

देख चुका मन कितने पतझर,
ग्रीष्म शरद, हिम पावस सुंदर,
ऋतुओं की ऋतु यह कुसुमाकर,
फिर वसंत की आत्मा आई,
विरह मिलन के खुले प्रीति व्रण,
स्वप्नों से शोभा प्ररोह मन।

सब युग सब ऋतु थीं आयोजन,
तुम आओगी वे थीं साधन,
तुम्हें भूल कटते ही कब क्षण?
फिर वसंत की आत्मा आई,
देव, हुआ फिर नवल युगागम,
स्वर्ग धरा का सफल समागम।

∼ सुमित्रानंदन पंत

Check Also

Ghost: 2019 Bollywood Horror Thriller Film

Ghost: 2019 Bollywood Horror Thriller Film

Movie Name: Ghost Movie Directed by: Vikram Bhatt Starring: Sanaya Irani, Shivam Bhaargava, Gary Heron …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *