Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » बाल-कविताओं का संग्रह: ओमप्रकाश बजाज (भाग 2)
ओमप्रकाश बजाज की बाल-कविताओं का संग्रह

बाल-कविताओं का संग्रह: ओमप्रकाश बजाज (भाग 2)

खिचड़ी: ओमप्रकाश बजाज

चावल-दाल मिला कर बनती,

खिचड़ी घर में सब को भाती।

रोगी को डॉक्टर खाने को कहते,

हल्की गिजा वे इसे मानते।

घी और मसालों का छौंक लगा कर,

छोटे-बड़े सब शौक से खाते।

बीरबल की खिचड़ी पकाना कहलाती,

जब किसी काम में अधिक देर हो जाती।

घी खिचड़ी में ही तो रहा, तब कहा जाता,

जब घर का पैसा घर में ही रह जाता।

जब किसी विचार पर वाद-विवाद चलता,

खिचड़ी पकाना वह भी कहलाता।

आयु बढ़ाने पर कुछ बाल सफ़ेद हो जाते,

तो मिले-जुले बाल खिचड़ी बाल कहलाते।

~ ओमप्रकाश बजाज

आपको ओमप्रकाश बजाज जी की यह कविता “खिचड़ी” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Life of Lord Buddha - English Poem on Gautam Buddha

Life of Lord Buddha: English Poem for Students and Children

There arose a Soul princely Before Christ, in the sixth century, To revive the Hindu …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *