नए साल की शुभकामनाएं - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

नए साल की शुभकामनाएं – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पांव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गांव को
नए साल की शुभकामनाएं।

जांते के गीतों को बैलों की चाल को
करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को
नए साल की शुभकामनाएं।

इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को
चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को
नए साल की शुभकामनाएं।

वीराने जंगल को तारों को रात को
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को
नए साल की शुभकामनाएं।

इस चलती आंधी में हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को
नए साल की शुभकामनाएं।

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को
नए साल की शुभकामनाएं।

उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
नए साल की शुभकामनाएं।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

आपको सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता “नए साल की शुभकामनाएं” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Numerology

साप्ताहिक अंक ज्योतिष सितंबर 2020: पिनाकी मिश्रा

साप्ताहिक अंक ज्योतिष 21 – 27 सितंबर, 2020: अंकशास्त्र विद्या (Numerology) में अंकों का विशेष स्थान …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *