नव वर्ष के कोरे पन्नों पर: नयें साल की कविता

नव वर्ष के कोरे पन्नों पर: नयें साल की कविता

नव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। प्रायः ये तिथि मार्च और अप्रैल के महीने में पड़ती है। पंजाब में नया साल बैशाखी नाम से १३ अप्रैल को मनाई जाती है। सिख नानकशाही कैलंडर के अनुसार १४ मार्च होला मोहल्ला नया साल होता है। इसी तिथि के आसपास बंगाली तथा तमिळ नव वर्ष भी आता है। तेलगु नया साल मार्च-अप्रैल के बीच आता है। आंध्रप्रदेश में इसे उगादी के रूप में मनाते हैं। यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है। तमिल नया साल विशु १३ या १४ अप्रैल को तमिलनाडु और केरल में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल १५ जनवरी को नए साल के रूप में आधिकारिक तौर पर भी मनाया जाता है। कश्मीरी कैलेंडर नवरेह १९ मार्च को होता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, कन्नड नया वर्ष उगाडी कर्नाटक के लोग चैत्र माह के पहले दिन को मनाते हैं, सिंधी उत्सव चेटी चंड, उगाड़ी और गुड़ी पड़वा एक ही दिन मनाया जाता है। मदुरै में चित्रैय महीने में चित्रैय तिरूविजा नए साल के रूप में मनाया जाता है। मारवाड़ी नया साल दीपावली के दिन होता है। गुजराती नया साल दीपावली के दूसरे दिन होता है। इस दिन जैन धर्म का नववर्ष भी होता है।लेकिन यह व्यापक नहीं है। अक्टूबर या नवंबर में आती है। बंगाली नया साल पोहेला बैसाखी १४ या १५ अप्रैल को आता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में इसी दिन नया साल होता है।

नव वर्ष के कोरे पन्नों पर: रजनी भार्गव

जब राह के पंछी घर को लौटें,
जब पेड़ के पत्ते झर-झर जाएँ,
जब आकाश ठंड का कोहरा ओढ़े,
आँखों के पानी से लिखी पाती मिल जाए,
एक उजले स्वप्न-सा आँखों में भर लेना,
आँखों की नमी से मुझको भिगो देना।
नव वर्ष के कोरे पन्नों पर भेज रही हूँ गुहार॥

जब फसल कटने के दिन आएँ,
धान के ढेर लगे हों घर द्वार,
लोढ़ी संक्राति और पोंगल लाए पके धान की बयार,
बसंत झाँके नुक्कड़ से बार-बार,
तुम सुस्ताने पीपल के नीचे आ जाना,
मेरी गोद में अपनी साँसों को भर जाना।
नव वर्ष के कोरे पन्नों पर भेज रही हूँ गुहार॥

ज़ब भी भीड़ में चलते-चलते कोई पुकारे मुझे,
और मैं पीछे मुड़ कर देखूँ,
तुम मेरे कंधे पर हाथ रखकर,
क़ानों में चुपके से कुछ कह कर,
थोड़ी देर के लिए अपना साथ दे जाना,
भीड़ के एकाकीपन में अपना परिचय दे जाना।
नव वर्ष के कोरे पन्नों पर भेज रही हूँ गुहार॥

रजनी भार्गव (Rajnee Bhargav)

रजनी भार्गव के बारे में:

जन्म: १५ फ़रवरी १९५९
शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर।
कार्यक्षेत्र: विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘प्रवासिनी के बोल’ काव्य संकलन में योगदान। अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य में निवास। बाल शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत।
Location: Plainsboro, New Jersey, United States

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