Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » नव वर्ष के कोरे पन्नों पर – रजनी भार्गव

नव वर्ष के कोरे पन्नों पर – रजनी भार्गव

Nav Varsh Ke Kore Panno Par

जब राह के पंछी घर को लौटें,
जब पेड़ के पत्ते झर-झर जाएँ,
जब आकाश ठंड का कोहरा ओढ़े,
आँखों के पानी से लिखी पाती मिल जाए,
एक उजले स्वप्न-सा आँखों में भर लेना,
आँखों की नमी से मुझको भिगो देना।
नव वर्ष के कोरे पन्नों पर भेज रही हूँ गुहार॥

जब फसल कटने के दिन आएँ,
धान के ढेर लगे हों घर द्वार,
लोढ़ी संक्राति और पोंगल लाए पके धान की बयार,
बसंत झाँके नुक्कड़ से बार-बार,
तुम सुस्ताने पीपल के नीचे आ जाना,
मेरी गोद में अपनी साँसों को भर जाना।
नव वर्ष के कोरे पन्नों पर भेज रही हूँ गुहार॥

ज़ब भी भीड़ में चलते-चलते कोई पुकारे मुझे,
और मैं पीछे मुड़ कर देखूँ,
तुम मेरे कंधे पर हाथ रखकर,
क़ानों में चुपके से कुछ कह कर,
थोड़ी देर के लिए अपना साथ दे जाना,
भीड़ के एकाकीपन में अपना परिचय दे जाना।
नव वर्ष के कोरे पन्नों पर भेज रही हूँ गुहार॥

∼ रजनी भार्गव

Check Also

बाला की दिवाली: गरीबों की सूनी दिवाली की कहानी

बाला की दिवाली: गरीबों की सूनी दिवाली की कहानी

“माँ… पटाखे लेने है मुझे” बाला ने दिवार के कोने में बैठे हुए कहा। “कहाँ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *