मेरी माँ - प्रभगुन सिंह - Short Hindi Poem on Mother

मेरी माँ: मातृ दिवस पर बाल-कविता

मातृ दिवस मनाने का शुरुआत सर्वप्रथम ग्रीस देश में हुई थी, जहां देवताओं की मां को पूजने का चलन शुरु हुआ था। इसके बाद इसे त्योहार की तरह मनाया जाने लगा। हर मां अपने बच्चों के प्रति जीवन भर समर्पित होती है। मां के त्याग की गहराई को मापना भी संभव नहीं है और ना ही उनके एहसानों को चुका पाना। लेकिन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता को प्रकट करना हमारा कर्तव्य है।

मां के प्रति इन्हीं भावों को व्यक्त करने के उद्देश्य से मातृ दिवस मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से मां के लिए समर्पित है। इस दिन को दुनिया भर में लोग अपने तरीके से मनाते हैं। कहीं पर मां के लिए पार्टी का आयोजन होता है तो कहीं उन्हें उपहार और शुभकामनाएं दी जाती है। कहीं पर पूजा अर्चना तो कुछ लोग मां के प्रति अपनी भावनाएं लिखकर जताते हैं। इस दिन करे मनाने का तरीका कोई भी हो, लेकिन बच्चों में मां के प्रति प्रेम और इस दिन के प्रति उत्साह चरम पर होता है।

मेरी माँ: प्रभगुन सिंह

माँ से मैंने हँसना सीखा,
माँ से गाना गाना।

माँ से सीखा गिरकर उठना,
आगे बढ़ते जाना।

माँ ने अक्षर-ज्ञान कराया,
मुझको पहली बार,

जग से प्यारी, सबसे न्यारी,
मेरी प्यारी-प्यारी माँ।

इसलिए तो मैं करता हूँ,
अपनी माँ से प्यार।

~ प्रभगुन सिंह (एल.के.जी.) St. Gregorios School, Sector 11, Dwarka, New Delhi – 110075

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