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मेरी किताब – सारिका अग्रवाल

मेरी किताब एक अनोठी किताब,
रहना चाहती हरदम मेरे पास।
बातें अनेक करती जुबानी
सिखलाती ढंग जीने का॥

मेरे प्रश्नों के उत्तर इसके पास,
हल करती तुरंत बार-बार।
हर एक पन्ने का नया अंदाज़,
मजबूर करता मुझे समझने को बार-बार॥

नया रंग नया ढंग,
मिलेगा भला ऐसा किस के पास।
मेरी किताब एक अनोठी किताब,
रहना चाहती हरदम मेरे पास॥

∼ सारिका अग्रवाल

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