मन रे तू काहे न धीर धरे – साहिर लुधियानवी

मन रे तू काहे न धीर धरे
वो निर्मोही मोह न जाने
जिनका मोह करे

इस जीवन की चढ़ती गिरती
धूप को किसने बांधा
रंग पे किसने पहरे डाले
रूप को किसने बांधा
काहे ये जतन करे
मन रे तू काहे न धीर धरे

उतना ही उपकार समझ कोई–
जितना साथ निभा दे
जनम मरण का मेल है सपना
यह सपना बिसरा दे
कोई न संग मरे
मन रे तू काहे न धीर धरे

वो निर्मोही मोह न जाने
जिनका मोह करे

∼ साहिर लुधियानवी

About Sahir Ludhianvi

साहिर लुधियानवी (८ मार्च १९२१ - २५ अक्टूबर १९८०) एक प्रसिद्ध शायर तथा गीतकार थे। इनका जन्म लुधियाना में हुआ था और लाहौर (चार उर्दू पत्रिकाओं का सम्पादन, सन् १९४८ तक) तथा बंबई (१९४९ के बाद) इनकी कर्मभूमि रही। फिल्म आजादी की राह पर (1949) के लिये उन्होंने पहली बार गीत लिखे किन्तु प्रसिद्धि उन्हें फिल्म नौजवान, जिसके संगीतकार सचिनदेव बर्मन थे, के लिये लिखे गीतों से मिली। फिल्म नौजवान का गाना ठंडी हवायें लहरा के आयें ..... बहुत लोकप्रिय हुआ और आज तक है। बाद में साहिर लुधियानवी ने बाजी, प्यासा, फिर सुबह होगी, कभी कभी जैसे लोकप्रिय फिल्मों के लिये गीत लिखे। सचिनदेव बर्मन के अलावा एन. दत्ता, शंकर जयकिशन, खय्याम आदि संगीतकारों ने उनके गीतों की धुनें बनाई हैं। 59 वर्ष की अवस्था में 25 अक्टूबर 1980 को दिल का दौरा पड़ने से साहिर लुधियानवी का निधन हो गया।

Check Also

Arjuna and the Kirata: Classic Tale from India

Arjuna and the Kirata: Classic Tale from India

The Pandavas were in exile. They had lost their kingdom and everything they had in …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *