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लजीली रात आई है - चिरंजीत

लजीली रात आई है – चिरंजीत

सजोले चांद को लेकर‚ नशीली रात आई है।
नशीली रात आई है।

बरसती चांदनी चमचम‚ थिरकती रागिनी छम छम‚
लहरती रूप की बिजली‚ रजत बरसात आई है।
नशीली रात आई है।

जले मधु रूप की बाती‚ दुल्हनिया रूप मदमाती‚
मिलन के मधुर सपनों की‚ सजी बारात आई है।
नशीली रात आई है।

सजी है दूधिया राहें‚ जगी उन्मादनी चाहें‚
रही जो अब तलक मन में‚ लबों पर बात आई है।
नशीली रात आई है।

~ चिरंजीत

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