क्यों करते हो झगड़े – शम्भू नाथ

क्यों करते हो झगड़े, क्यों पालते हो लफ़ड़े
आपस में प्रेम करो, बैर विरोध मिटाओ।

सब छोड़ यहीं जाना है, कुछ साथ नहीं जायेगा
अच्छाई और बुराई का लेख, यहीं रह जायेगा
रह-रह कर प्यारे, तू भी पछतायेगा।

ये पानी की बूंदें हैं, सागर का किनारा है
यहाँ सबको आना है, सबको जाना है
जब जाना है अकेला तो, क्यों करते हो झमेला
सब कुछ यहीं रहेगा, कर्म जायेगा अकेला।

दुनिया में प्यार मोहब्बत, हिल-मिल करके चलो
अपने ही जीवन पर, एक दो लेख जरूर लिखो।

क्यों करते हो पंगा, क्यों होते हो नंगा
ये दो दिन की माया है, छोड़ के जाओगे चंगा
अब न करना पंगा, अब न होना नंगा
प्यार से रहना सीखो, होगा सब कुछ अच्छा
जब ऊपर जाओगे, फिर खाओगे ना डंडा।

∼ शम्भू नाथ

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