कौन तुम मेरे हृदय में? - महादेवी वर्मा

कौन तुम मेरे हृदय में? महादेवी वर्मा की खूबसूरत प्रेम कविता

Here is excerpt from a famous poem of Mahadevi Verma. Love takes root in the heart and suddenly the world looks so different!

कौन मेरी कसक में नित
मधुरता भरता अलक्षित?
कौन प्यासे लोचनों में
घुमड़ घिर झरता अपरिचित?

स्वर्ण सपनों का चितेरा
नींद के सूने निलय में!
कौन तुम मेरे हृदय में?

अनुसरण निःश्वास मेरे
कर रहे किसका निरंतर?
चूमने पदचिन्ह किसके
लौटते यह श्वास फिर फिर?

कौन बन्दी कर मुझे अब
बँध गया अपनी विजय में
कौन तुम मेरे हृदय में?

गूँजता उर में न जाने
दूर के संगीत सा क्या!
आज खो निज को मुझे
खोया मिला विपरीत सा क्या!

क्या नहा आयी विरह–निशी
मिलन–मधु–दिन के उदय में?
कौन तुम मेरे हृदय में?

महादेवी वर्मा

आपको “महादेवी वर्मा” जी की यह कविता “कौन तुम मेरे हृदय में?” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: admin@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

मैं नारी - अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर एक कविता

अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर हिंदी कविता: मैं नारी

1933 से 1945 के बीच अमेरिका की फर्स्ट लेडी रहीं एलियानोर रूजवेल्ट ने कहा था, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *