Hindi Poem about Karwa Chauth Festival करवा चौथ

करवा चौथ: भारतीय सुहागिन का त्यौहार

सुहाग का यह व्रत हर साल कार्तिक के पवित्र महीने में संकष्टी चतुर्थी के दिन यानी कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि को किया जाता है। सुहागनें इस दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में सरगी खाकर व्रत अरंभ करती हैं। व्रत पूरे दिन का होता। रात में चांद को छन्नी से देखकर व्रत का समापन किया जाता है। इस व्रत में चांद को देखने से पहले व्रतियों को पानी भी नहीं पीना होता है इसलिए इसे निर्जला व्रत कहा जाता है।

सौभाग्य के इस व्रत में इस साल दो बड़े ही शुभ संयोग बने हैं। इस साल सभी प्रकार की सिद्धियों को देना वाला सर्वार्थ सिद्धि योग बना है। इसके अलावा इस शाम अमृत सिद्धि योग भी बना है। इन दोनों योगों के अलावा शुभ संयोग यह भी है कि इस दिन चंद्रमा शुक्र की राशि वृष में होंगे और चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि होगी।

ग्रह नक्षत्रों का यह शुभ संयोग इस बात का सूचक है इस इस साल करवा चौथ का व्रत सुहागनों के लिए बहुत ही शुभ फलदायक है। जिनके दांपत्यजीवन में किसी कारण से परेशानी चल रही है उन्हें इस व्रत से प्रेम और दाम्पत्य सुख की प्राप्ति होगी।

शुक्र राशि में चंद्रमा के होने से कई राशियों में प्रेम संबंध प्रगाढ होने का योग बन रहा है। वृष राशि की महिलाओं के लिए इस बार करवाचौथ का व्रत बहुत ही शुभ फलदायी होगा। इनके दाम्पत्य जीवन में आपसी विश्वास, स्नेह और सहयोग बढ़ेगा। संतान के इच्छुक जोड़ों को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। जिन कुंवारी कन्याओं के विवाह की बात चल रही है वह भी करवचौथ का व्रत रख सकती हैं इससे विवाह का योग प्रबल होगा।

करवा चौथ: सीमा सच

करवा चौथ का त्यौहार, लाए ख़ुशियाँ हजार
हर सुहागिन के दिल का, ये अरमान है

प्यारे पिया में बसी, उसकी जान है
पिया के लिए ही, व्रत करती है वह

उसके नाम से ही, अपनी माँग भरती है वह
पिया की दीर्घायु के लिए, करती है दुआ

भूखी-प्यासी रहती है, बस चाहती है पिया
पिया ही तो उसकी ख़ुशियों, का संसार है

आज प्यारा पिया, का ही दीदार है
चाँद फीका लगे, पिया चाँद के आगे

और चाँद से ही पिया की, लंबी आयु मांगे
बस भावुकता से यह, ओत-प्रोत है

प्यारा प्यार का त्यौहार, यह करवा चौथ है

सीमा सच

कथा:

एक समय की बात है, करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी किनारे बसे गांव में रहती थीं। एक दिन इनके पति नदी में स्नान करने गए। स्नान करते समय नदी में एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया गहरे पानी में ले जाने लगा। मृत्यु को करीब देखकर करवा माता के पति ने करवा को नाम लेकर पुकारना शुरू किया।

पति की आवाज सुनकर करवा माता नदी तट पर पहुंची और पति को मृत्यु के मुख में देखकर क्रोधित हो गईं। करवा माता ने एक कच्चे धागे से मगरमच्छ को बांध दिया और कहा कि अगर मेरा पतिव्रत धर्म सच्चा है तो मगरमच्छ मेरे पति को लेकर गहरे जल में नहीं ले जा सके। इसके बाद यमराज वहां उपस्थित हुए। उन्होंने करवा से कहा कि तुम मगरमच्छ को मुक्त कर दो। इस पर करवा ने कहा कि मगरमच्छ ने मेरे पति को मारने का प्रयत्न किया है इसलिए इसे मृत्युदंड दीजिए और मेरे पति की रक्षा कीजिए।

तब यमराज ने कहा कि अभी मगरमच्छ की आयु शेष है, अत: मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा ने यमराज से अपने पति के प्राण न हरने की विनय करते हुए कहा कि मैं अपने सतीत्व के बल पर आपको अपने पति के प्राण नहीं ले जाने दूंगी, आपको मेरी विनय सुननी ही होगी। इस पर यमराज ने कहा कि तुम पतिव्रता स्त्री हो और मैं तुम्हारे सतीत्व से प्रभावित हूं। ऐसा कहकर यमराज ने मगरमच्छ के प्राण ले लिए और करवा के पति को दीर्घायु का वरदान मिला।

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