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Karva Chauth Festival Hindi Poem करवा चौथ का चाँद

करवा चौथ का चाँद: Karva Chauth Festival Poem

करवा चौथ‘ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘करवा’ यानी ‘मिट्टी का बरतन’ और ‘चौथ’ यानि ‘चतुर्थी’। इस त्योहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व माना गया है। सभी विवाहित स्त्रियां साल भर इस त्योहार का इंतजार करती हैं और इसकी सभी विधियों को बड़े श्रद्धा-भाव से पूरा करती हैं। करवाचौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है।

करवाचौथ का इतिहास

बहुत-सी प्राचीन कथाओं के अनुसार करवाचौथ की परंपरा देवताओं के समय से चली आ रही है। माना जाता है कि एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध शुरू हो गया और उस युद्ध में देवताओं की हार हो रही थी। ऐसे में देवता ब्रह्मदेव के पास गए और रक्षा की प्रार्थना की। ब्रह्मदेव ने कहा कि इस संकट से बचने के लिए सभी देवताओं की पत्नियों को अपने-अपने पतियों के लिए व्रत रखना चाहिए और सच्चे दिल से उनकी विजय के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

ब्रह्मदेव ने यह वचन दिया कि ऐसा करने पर निश्चित ही इस युद्ध में देवताओं की जीत होगी। ब्रह्मदेव के इस सुझाव को सभी देवताओं और उनकी पत्नियों ने खुशी-खुशी स्वीकार किया। ब्रह्मदेव के कहे अनुसार कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा और अपने पतियों यानी देवताओं की विजय के लिए प्रार्थना की। उनकी यह प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की जीत हुई। इस खुशखबरी को सुन कर सभी देव पत्नियों ने अपना व्रत खोला और खाना खाया। उस समय आकाश में चांद भी निकल आया था। माना जाता है कि इसी दिन से करवाचौथ के व्रत के परंपरा शुरू हुई।

करवा चौथ का चाँद: बीना गुप्ता

सुबह सवेरे मुंह अँधेरे,
उठ पूजा कर, कुछ कौर,
सखिसंग मुंह में धकेले।

दिनभर बिन खानपान,
कछुए सी घडी की चाल,
पेट आंते मचाये भूचाल।

साँझ बनसंवर पूजा कर,
रीतिरिवाज निपटा कर,
मौजमस्ती भी करी जीभर।

अब पिया का राह ताकें,
सभी को खिला पिलाकर,
टकटकी लगी आसमान पर।

ऐ चाँद कहाँ छुपे हो,
आजाओ झलक दिखाओ,
पूजा करवा व्रत तोडवाओ।

एक चाँद पलकों में,
एक इतराए अर्श पर,
लुका छिप्पी करे बादलों में।

अपने चाँद की उम्र के लिए पूजन,
दूजे की झलक को उत्सुक यह मन,
ऐ चाँद चांदनी को चंद लम्हे करो अर्पण।

कहाँ छिपे हो निर्मोही,
हलक जिव्हा सूखे मोरी,
तपस्या सार्थक कीजो जल्दी।

आज है करवा चौथ,
पूरा दिन किया उपवास,
ऐ चाँद दौडे आओ हमारे पास।

बीना गुप्ता

आपको “बीना गुप्ता” जी की यह कविता “करवा चौथ का चाँद” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

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