झंडा ऊँचा रहे हमारा – श्यामलाल पार्षद

झंडा ऊँचा रहे हमारा: श्यामलाल पार्षद उत्प्रेरक झंडा गीत

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भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे तिरंगा भी कहते हैं, तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है। इसकी अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी। इसे १५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व २२ जुलाई, १९४७ को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था। इसमें तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियाँ हैं, जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है। ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात ३:२ है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग का एक चक्र है जिसमें २४ आरे होते हैं। इस चक्र का व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है व रूप सारनाथ में स्थित अशोक स्तंभ के शेर के शीर्षफलक के चक्र में दिखने वाले की तरह होता है। भारतीय राष्ट्रध्वज अपने आप मै ही भारत की निति को दर्शाता हुआ दिखाई देता है। आत्मरक्षा, शांति, समृद्धि और सदैव विकास की ओर अग्रसर।

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा: श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा

सदा शक्ति बरसाने वाला
प्रेम–सुधा सरसाने वाला
वीरों को हर्षाने वाला
मातृभूमि का तन–मन सारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा

स्वतंत्रता के भीषण रण में
लड़ कर जोश भरे छन–छन में
कांपे क्षत्रु देखकर मन में
मिट जाये भय–संकट सारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा

इस झंडे के नीचे निर्भय
ले स्वराज्य हम अब चल निश्चय
बोलें भारत माता की जय
स्वतंत्रता है ध्येय हमारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा

आओ प्यारे वीरो आओ
देश–धर्म पर बलि–बलि जाओ
एक साथ सब मिल कर गाओ
प्यारा भारत देश हमारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा

इसकी शान न जाने पाये
छााहे जान भले ही जाये
विश्व विजय करके दिखलाये
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा

~ श्यामलाल पार्षद

श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ (जन्म: 16 सितम्बर 1893; मृत्य: 10 अगस्त, 1977) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक सेनानी, पत्रकार, समाजसेवी एवं अध्यापक थे। श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’, भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान उत्प्रेरक झण्डा गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा – झंडा ऊँचा रहे हमारा‘ के रचयिता थे।

1973 में उन्हें ‘पद्म श्री’ से अलंकृत किया गया। उनकी मृत्यु के बाद कानपुर और नरवल में उनके अनेकों स्मारक बने। नरवल में उनके द्वारा स्थापित बालिका विद्यालय का नाम ‘पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ राजकीय बालिका इंटर कालेज किया गया। फूलबाग, कानपुर में ‘पद्मश्री’ श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ पुस्तकालय की स्थापना हुई। 10 अगस्त, 1994 को फूलबाग में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई। इसका अनावरण उनके 99वें जन्मदिवस पर किया गया। झंडागीत के रचयिता, ऐसे राष्ट्रकवि को पाकर देश की जनता धन्य है।

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