Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » जीकर देख लिया – शिव बहादुर सिंह भदौरिया

जीकर देख लिया – शिव बहादुर सिंह भदौरिया

जीकर देख लिया
जीने में
कितना मरना पड़ता है

अपनी शर्तों पर जीने की
एक चाह सबमें रहती है
किन्तु ज़िन्दगी अनुबंधों के
अनचाहे आश्रय गहती है

क्या-क्या कहना
क्या-क्या सुनना
क्या-क्या करना पड़ता है

समझौतों की सुइयाँ मिलतीं
धन के धागे भी मिल जाते
संबंधों के फटे वस्त्र तो
सिलने को हैं सिल भी जाते

सीवन,
कौन कहाँ कब उधड़े
इतना डरना पड़ता है

मेरी कौन बिसात यहाँ तो
संन्यासी भी साँसत ढोते
लाख अपरिग्रह के दर्पण हों
संग्रह के प्रतिबिंब संजोते

कुटिया में
कौपीन कमंडल
कुछ तो धरना पड़ता है

∼ शिव बहादुर सिंह भदौरिया

Check Also

साप्ताहिक भविष्यफल अक्टूबर 2019

साप्ताहिक भविष्यफल 13 – 19 अक्टूबर, 2019 Weekly Bhavishyafal भविष्यफल अक्टूबर 2019: पंडित असुरारी नन्द …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *