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जय जय शिव शंकर – आनंद बक्षी

Rajesh Khanna Mumtazजय जय शिव शंकर
काँटा लगे न कंकर
जो प्याला तेरे नाम का पिया
ओ गिर जाऊँगी, मैं मर जाऊँगी
जो तूने मुझे थाम न लिया
सो रब दी
जय जय शिव शंकर…

एक के दो दो के चार हमको तो दिखते हैं
ऐसा ही होता है जब दो दिल मिलते हैं
सर पे ज़मीं पाँव के नीचे है आसमान, हो~
सो रब दी
जय जय शिव शंकर…

कंधे पे सर रख के तुम मुझको सोने दो
मस्ती में जो चाहे हो जाये होने दो
ऐसे में तुम हो गये बड़े बेईमान, हो~
सो रब दी
जय जय शिव शंकर…

रस्ते में हम दोनों घर कैसे जायेंगे
घर वाले अब हमको खुद लेने आयेंगे
कुछ भी हो लेकिन मज़ा आ गया मेरी जान, हो~
सो रब दी
जय जय शिव शंकर…

∼ आनंद बक्षी

चित्रपट : आप की कसम (१९८४)
गीतकार : आनंद बक्षी
संगीतकार : आर. डी. बर्मन
गायक : किशोर कुमार, लता मंगेशकर,
सितारे : राजेश खन्ना, मुमताज़, संजीव कुमार

About Anand Bakshi

Anand Bakshi (21 July 1930 – 30 March 2002) was a popular Indian poet and lyricist. आनंद बख़्शी यह वह नाम है जिसके बिना आज तक बनी बहुत बड़ी-बड़ी म्यूज़िकल फ़िल्मों को शायद वह सफलता न मिलती जिनको बनाने वाले आज गर्व करते हैं। आनन्द साहब चंद उन नामी चित्रपट (फ़िल्म) गीतकारों में से एक हैं जिन्होंने एक के बाद एक अनेक और लगातार साल दर साल बहुचर्चित और दिल लुभाने वाले यादगार गीत लिखे, जिनको सुनने वाले आज भी गुनगुनाते हैं, गाते हैं। जो प्रेम गीत उनकी कलम से उतरे उनके बारे में जितना कहा जाये कम है, प्यार ही ऐसा शब्द है जो उनके गीतों को परिभाषित करता है और जब उन्होंने दर्द लिखा तो सुनने वालों की आँखें छलक उठीं दिल भर आया, ऐसे गीतकार थे आनन्द बक्षी। दोस्ती पर शोले फ़िल्म में लिखा वह गीत 'यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेगे' आज तक कौन नहीं गाता-गुनगुनाता। ज़िन्दगी की तल्खियो को जब शब्द में पिरोया तो हर आदमी की ज़िन्दगी किसी न किसी सिरे से उस गीत से जुड़ गयी। गीत जितने सरल हैं उतनी ही सरलता से हर दिल में उतर जाते हैं, जैसे ख़ुशबू हवा में और चंदन पानी में घुल जाता है। मैं तो यह कहूँगा प्रेम शब्द को शहद से भी मीठा अगर महसूस करना हो तो आनन्द बक्षी साहब के गीत सुनिये। मजरूह सुल्तानपुरी के साथ-साथ एक आनन्द बक्षी ही ऐसे गीतकार हैं जिन्होने 43 वर्षों तक लगातार एक के बाद एक सुन्दर और कृतिमता (बनावट) से परे मनमोहक गीत लिखे, जब तक उनके तन में साँस का एक भी टुकड़ा बाक़ी रहा।

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