होली आती याद दिलाती – नीलकमल वैष्णव ‘अनिश’

होली आती याद दिलाती,
पिछली कितनी होली।

वो बचपन वाली होली,
वो गुब्बारों वाली होली,
वो सखियों वाली होली,
वो गुझियों वाली होली,
वो ठुमको वाली होली,
होली आती याद दिलाती,
पिछली कितनी होली।

हर होली अलबेली होती,
होली आती हमें बताती,
जाने कितने राज दिखाती,
होली आती रंग लगाती,
होली आती गले लगाती,
आकर सबको नहलाती,
तन मन की वो मैल हटाती,
होली आती याद दिलाती,
पिछली कितनी होली।

होली आती याद दिलाती,
रंगों से तन-मन सहलाती,
भीगे-भीगे गीत सुनाती,
पिचकारी से रंग बरसाती,
भाभी, साली से रंग डलवाती,
होली आती याद दिलाती,
पिछली कितनी होली।

∼ नीलकमल वैष्णव ‘अनिश’

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