होली विशेष हिंदी बाल-कविता: हो हल्ला है होली है

हो हल्ला है होली है: प्रभुदयाल श्रीवास्तव – होली विशेष हिंदी बाल-कविता

उड़े रंगों के गुब्बारे हैं,
घर आ धमके हुरयारे हैं।
मस्तानों की टोली है,
हो हल्ला है, होली है।

मुंह बन्दर सा लाल किसी का,
रंगा गुलाबी भाल किसी का।
कोयल जैसे काले रंग का,
पड़ा दिखाई गाल किसी का।
काना फूसी कुछ लोगों में,
खाई भांग की गोली है।

ढोल ढमाका ढम ढम ढम ढम,
नाचे कूदे फूल गया दम।
उछल रहे हैं सब मस्ती में,
शोर शराबा है है बस्ती में।
कुछ बच्चों ने नल पर जाकर,
अपनी सूरत धो ली है।

छुपे पेड़ के पीछे बल्लू,
पकड़ खींच कर लाये लल्लू।
समझ गए अब बचना मुश्किल,
लगे जोर से हँसने खिल खिल।
गड़बड़िया ने उन्हें देखकर,
रंग की पुड़िया घोली है।

हुरयारों की बल्ले बल्ले,
गुझियां लड्डू और रसगुल्ले।
मजे मजे से खाते जाते,
रंग अबीर उड़ाते जाते।
द्वेष राग की गाँठ बंधी थी,
आज सभी ने खोली है।

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

आपको प्रभुदयाल श्रीवास्तव जी की यह कविता “हो हल्ला है होली है” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Navratri Date - Hindu Culture & Tradition

Navratri Date: Chaitra & Sharad Navratri Dates

Navratri is an important Hindu festival, celebrated with religious fervor and great enthusiasm by the …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *