Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » एक कण दे दो न मुझको – अंचल
एक कण दे दो न मुझको - अंचल

एक कण दे दो न मुझको – अंचल

तुम गगन–भेदी शिखर हो मैं मरुस्थल का कगारा
फूट पाई पर नहीं मुझमें अभी तक प्राण धारा
जलवती होती दिशाएं पा तुम्हारा ही इशारा
फूट कर रसदान देते सब तुम्हारा पा सहारा

गूँजती जीवन–रसा का एक तृण दे दो न मुझको,
एक कण दे दो न मुझको।

जो नहीं तुमने दिया अब तक मुझे, मैंने सहा सब
प्यास की तपती शिलाओं में जला पर कुछ कहा कब
तृप्ति में आकंठ उमड़ी डूबती थी मृगशिरा जब
आग छाती में दबाए भी रहा मैं देवता! तब

तुम पिपासा की बुझन का एक क्षण दे दो न मुझको,
एक कण दे दो न मुझको।

तुम मुझे देखो न देखो प्रेम की तो बात ही क्या
सांझ की बदली न जब मुझको मिलन की रात ही क्या
दान के तुम सिंधु मुझको हो भला यह ज्ञात ही क्या
दाह में बोले न जो उसको तुम्हें प्रणिपात ही क्या

छाँह की ममता भरी श्यामल शरण दे दो न मुझको,
एक कण दे दो न मुझको।

अंचल

Check Also

Pal Pal Dil Ke Paas: 2019 Hindi Romantic Drama

Pal Pal Dil Ke Paas: 2019 Hindi Romantic Drama

Movie Name: Pal Pal Dil Ke Paas Movie Directed by: Sunny Deol Starring: Karan Deol, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *