Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » एक गीत और कहो – पूर्णिमा वर्मन

एक गीत और कहो – पूर्णिमा वर्मन

सरसों के रंग सा‚ महुए की गंध सा
एक गीत और कहो मौसमी वसंत का।

होठों पर आने दो रूके हुए बोल
रंगों में बसने दो याद के हिंदोल
अलकों में झरने दो गहराती शाम
झील में पिघलने दो प्यार के पैगाम
अपनों के संग सा‚ बहती उमंग सा
एक गीत और कहो मौसमी वसंत का।

मलयानिल झोंकों में डूबते दलान
केसरिया होने दो बांह के सिवान
अंगों में खिलने दो टेसू के फूल
सांसों तक बहने दो रेशमी दुकूल
तितली के रंग सा‚ उड़ती पतंग सा
एक गीत और कहो मौसमी वसंत का।

∼ पूर्णिमा वर्मन

About Purnima Varman

जन्म: २७ जून १९५५ को पीलीभीत में। शिक्षा: संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि, स्वातंत्र्योत्तर संस्कृत साहित्य पर शोध, पत्रकारिता और वेब डिज़ायनिंग में डिप्लोमा। कार्यक्षेत्र: पूर्णिमा वर्मन का नाम वेब पर हिंदी की स्थापना करने वालों में अग्रगण्य है। १९९६ से निरंतर वेब पर सक्रिय, उनकी जाल पत्रिकाएँ अभिव्यक्ति तथा अनुभूति वर्ष २००० से अंतर्जाल पर नियमित प्रकाशित होने वाली पहली हिंदी पत्रिकाएँ हैं। इनके द्वारा उन्होंने प्रवासी तथा विदेशी हिंदी लेखकों को एक साझा मंच प्रदान करने का महत्त्वपूर्ण काम किया है। लेखन एवं वेब प्रकाशन के अतिरिक्त वे जलरंग, रंगमंच, संगीत तथा हिंदी के अंतर्राष्ट्रीय विकास के अनेक कार्यों से जुड़ी हैं।

Check Also

1 Lakh Eggs Crack Open On Highway After Truck Flips Over

1 Lakh Eggs Crack Open On Highway After Truck Flips Over

It took two hours to clean up the mess. ‘Egg-splosion’ down the Hangzhou-Jingdezhen Highway. On …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *