दिन होली के - यतीन्द्र राही

दिन होली के – यतीन्द्र राही

गीत फाग के, दिन मस्ती के
उलझन-झिड़क ज़बरदस्ती के
बौरे-बहके-गंधनशीले
रूप दहकते रंग गरबीले
Radha Krishna Holiधरते पाँव सँवार झूमते
जैसे हों कहार डोली के
दिन होली के।

टिमकी ढोलक, बजे मंजीरे
ताल-स्वरों के चरन अधीरे
ढप पर थाप, झाँझ पर झोके
मन मचले, रोके ना रोके
नचती राधा हुई बावरी
कान्हा कहीं किसी टोली के
दिन होली के।

उड़त गुलाल लाल भए बादर
आसमान रंगों की झालर
झरे अबीर चले पछवैया
आँगन बोले सोन चिरैया
मन के द्वार, नयन के पनघट
रंग बिखरते मिठबोली के
दिन होली के।

यतीन्द्र राही

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