Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » चूड़ी का टुकड़ा: गिरिजा कुमार माथुर
चूड़ी का टुकड़ा: गिरिजा कुमार माथुर

चूड़ी का टुकड़ा: गिरिजा कुमार माथुर

आज अचानक सूनी­सी संध्या में
जब मैं यों ही मैले कपड़े देख रहा था
किसी काम में जी बहलाने,
एक सिल्क के कुर्ते की सिलवट में लिपटा,
गिरा रेशमी चूड़ी का
छोटा­सा टुकड़ा,
उन गोरी कलाइयों में जो तुम पहने थीं,
रंग भरी उस मिलन रात में

मैं वैसे का वैसा ही
रह गया सोचता
पिछली बातें
दूज­ कोर से उस टुकड़े पर
तिरने लगीं तुम्हारी सब लज्जित तस्वीरें,
सेज सुनहली,
कसे हुए बन्धन में चूड़ी का झर जाना,
निकल गई सपने जैसी वह मीठी रातें,
याद दिलाने रहा
यही छोटा­ सा टुकड़ा

गिरिजा कुमार माथुर

आपको “गिरिजा कुमार माथुर” जी की यह कविता “चूड़ी का टुकड़ा” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Top 20 Bollywood Songs

Bollywood Movies Releasing This Friday

Bollywood Movies Releasing This Week (Friday): 24 January, 2020 Fridays are the special days on …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *