Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » भिन्न – अनामिका
भिन्न - अनामिका

भिन्न – अनामिका

मुझे भिन्न कहते हैं
किसी पाँचवीं कक्षा के क्रुद्ध बालक की
गणित पुस्तिका में मिलूंगी –
एक पाँव पर खड़ी – डगमग।

मैं पूर्ण इकाई नहीं –
मेरा अधोभाग
मेरे माथे से सब भारी पड़ता है
लोग मुझे मानते हैं ठीक ठाक
अंग्रेजी में ‘प्रॉपर फ्रैक्शन’।

अगर कहीं गलती से
मेरा माथा
मेरे अधोभाग से भारी पड़ जाता है
लोगों के गले यह नहीं उतरता
और मेरे माथे पर बट्टा लग जाता है
‘इंप्रॉपर फ्रैक्शन’ का।

क्या माथा अधोभाग से भारी होना
इतना अनुचित है मेरे मालिक मेरे आका?
क्या इससे बढ़ जाती है मेरी दुरूहता?
कितने बरस और अभी रहेंगे आप
इसी पाँचवीं कक्षा के बालक की मनोदशा से?
लगातार मुझे काटते छाँटते
गोदी में मेरी
नन्हीं इकाइयाँ बिठाकर
वही लँगड़ी भिन्न बनाते
तीन होल नंबर फलाँ बटा फलाँ?

कब तक बाँटना कब तक छाँटना
देखिए मुझे अपने अंतिम दशमलव तक
फिर कहिये, क्या मैं बहुत भिन्न हूँ आपसे?

∼ अनामिका

Check Also

Bollywood 2018 Horror Comedy Film: Nanu Ki Jaanu Movie Review

Bollywood 2018 Horror Comedy Film: Nanu Ki Jaanu Movie Review

Directed by: Faraz Haider Starring: Abhay Deol, Patralekha, Manu Rishi Release date: 20 April 2018 …