बाल श्रमिक - भारत के बाल मजदूरों पर हिंदी कविता

बाल श्रमिक: भारत के बाल मजदूरों पर हिंदी कविता

बाल मजदूरी बच्चों से लिया जाने वाला काम है जो किसी भी क्षेत्र में उनके मालिकों द्वारा करवाया जाता है। ये एक दबावपूर्णं व्यवहार है जो अभिवावक या मालिकों द्वारा किया जाता है। बचपन सभी बच्चों का जन्म सिद्ध अधिकार है जो माता-पिता के प्यार और देख-रेख में सभी को मिलना चाहिए, ये गैरकानूनी कृत्य बच्चों को बड़ों की तरह जीने पर मजबूर करता है। इसके कारण बच्चों के जीवन में कई सारी जरुरी चीजों की कमी हो जाती है जैसे – उचित शारीरिक वृद्धि और विकास, दिमाग का अनुपयुक्त विकास, सामाजिक और बौद्धिक रुप से अस्वास्थ्यकर आदि। इसकी वजह से बच्चे बचपन के प्यारे लम्हों से दूर हो जाते है, जो हर एक के जीवन का सबसे यादगार और खुशनुमा पल होता है। ये किसी बच्चे के नियमित स्कूल जाने की क्षमता को बाधित करता है जो इन्हें समाजिक रुप से देश का खतरनाक और नुकसान दायक नागरिक बनाता है। बाल मजदूरी को पूरी तरह से रोकने के लिये ढ़ेरों नियम-कानून बनाने के बावजूद भी ये गैर-कानूनी कृत्य दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है।

वो कृष्णा,
थक जाता होगा सारा दिन…
सर पे बोझ उठता होगा, मेरा घर कब बन पायेगा?
ऐसा ख़्वाब सजाता होगा!

चन्दू,
चाय की दूकान से थक के घर जाता होगा
यकीनन खुद को सब से बड़ा पता होगा
जब दो जून की रोटी कमा के लाता होगा,

बेला,
का बचपन जल जाता होगा
जब कोई खिलौना छीन लिया जाता होगा…
बर्तन क्यों साफ़ नहीं है
कह के कोई मालिक जब चिल्लाता होगा…

रहीम,
फूल बेचता फिरता है
कभी पेन किताब दिखता है सड़कों पे,
यकीन उसका मन भी कुछ लिखने को
कर जाता होगा!

खेल का मैदान नहीं है!
भूखे जिस्म में जान नहीं है!
करवाते हो मजदूरी दिन भर…
ये बच्चा क्या इन्सान नहीं है?

मैं सोचती हूँ क्या इंसान? क्या भगवान?
कोई इसके लिए परेशान नहीं है?
कोई तो संभालो इसको…

मेरे देश की क्या ये पहचान नहीं है?
यूँ मत रोंदो बचपन इनका…
जीवन है जीवन… आसन नहीं है!

~ सायरा कुरैशी

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2 comments

  1. mohit shrivastava

    दिल को छूने वाली पंक्तियाँ

  2. बहुत अछि लाइन है very NICE