Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » आँगन – धर्मवीर भारती
आँगन - धर्मवीर भारती

आँगन – धर्मवीर भारती

बरसों के बाद उसी सूने- आँगन में
जाकर चुपचाप खड़े होना
रिसती-सी यादों से पिरा-पिरा उठना
मन का कोना-कोना

कोने से फिर उन्हीं सिसकियों का उठना
फिर आकर बाँहों में खो जाना
अकस्मात् मण्डप के गीतों की लहरी
फिर गहरा सन्नाटा हो जाना
दो गाढ़ी मेंहदीवाले हाथों का जुड़ना,
कँपना, बेबस हो गिर जाना

रिसती-सी यादों से पिरा-पिरा उठना
मन को कोना-कोना
बरसों के बाद उसी सूने-से आँगन में
जाकर चुपचाप खड़े होना!

~ धर्मवीर भारती

Check Also

Rashifal

साप्ताहिक राशिफल सितंबर 2018 Bejan Daruwala

साप्ताहिक राशिफल सितंबर 2018 – ज्योतिष बेजन दारूवाला राशियाँ राशिचक्र के उन बारह बराबर भागों …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *