15 अगस्त - मीनाक्षी भालेराव

15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस पर प्रेरणादायक देशभक्ति बाल-कविता

भारत में स्वतंत्रता दिवस, सभी धर्म, परंपरा और संस्कृति के लोग पूरी खुशी से एक साथ मनाते हैं। 15 अगस्त 1947 से ही ये हर साल इसी दिन मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन लगभग 200 साल बाद भारत को ब्रिटिश हुकुम़त से आजादी मिली थी।

इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश के रुप में घोषित किया गया साथ ही सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय तथा कार्यालय आदि भी बंद रहते है। इसे सभी स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थीयों द्वारा पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। विद्यार्थी इसमें खेल, कला तथा साहित्य के माध्यम से भाग लेते है। इन कार्यक्रमों के आरंभ से पहले मुख्य अतिथि अथवा प्रधानाचार्य द्वारा झंडारोहण किया जाता है जिसमें सभी मिलकर एक साथ बाँसुरी और ड्रम की धुन पर राष्ट्रगान करते है और उसके बाद परेड और विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा इस दिन को खास बनाया जाता है।

स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के राजपथ पर भारत सरकार द्वारा इस दिन को एक उत्सव का रुप दिया जाता है जहाँ सभी धर्म, संस्कृति और परंपरा के लोग भारत के प्रधानमंत्री की देशभक्ती से पू्र्ण भाषण सुनते है। इस अवसर पर हम लोग उन सभी महान व्यक्तिव को याद करते है जिनके बलिदान की वजह से हम सभी आजाद भारत में सांस ले रहे हैं।

15 अगस्त: मीनाक्षी भालेराव

जब-जब 15 अगस्त आता है,
मन आंगन में रस बरसाता है।

मन में नये अहसास नई
उमंगें जगाता है,
वीरों के गुणगान गाता है।

जब-जब वीर रस बरसता है
तब-तब जीवन फिर,
मधुमास बन जाता है।

प्रतिध्वनियों सा बज कर
सोये वीरों को जगाता है।

भारत माँ की शान में
जीना-मरना सिखलाता है।

वीरों का कोलाहल मन में
देश प्रेम जगाता है।

हिन्दू-मुस्लिम, सिख, ईसाई
होने का भ्रम मिटाता है।

जब-जब 15 अगस्त आता है
मन आंगन में रस बरसाता है।

मीनाक्षी भालेराव

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